मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के दिग्गज शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के लिए शुक्रवार का दिन काला साबित हुआ। केंद्र सरकार द्वारा डीजल और एटीएफ (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) दोबारा लागू करने के फैसले से निवेशकों में हड़कंप मच गया। इस एक फैसले के चलते रिलायंस के शेयरों में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी की मार्केट वैल्यू (बाजार पूंजीकरण) में करीब ₹82,000 करोड़ की भारी कमी आ गई।
सरकार का फैसला: निर्यात पर लगाम, घरेलू मोर्चे पर राहत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस कड़े कदम के पीछे 'घरेलू आपूर्ति' को मुख्य प्राथमिकता बताया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार:
निर्यात शुल्क में वृद्धि: डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर और एटीएफ (हवाई ईंधन) पर ₹29.5 प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी गई है।
उद्देश्य: वैश्विक अस्थिरता के बीच देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और राजस्व को संतुलित करना।
आम जनता को राहत: निर्यात पर टैक्स बढ़ाने के साथ ही सरकार ने घरेलू स्तर पर पेट्रोल पर ₹3 प्रति लीटर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी घटा दी है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
रिलायंस पर ही सबसे ज्यादा असर क्यों?
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनर और निर्यातक कंपनी है।
निर्यात का बड़ा हिस्सा: जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरियां भारत के कुल एटीएफ उत्पादन का लगभग 25% हिस्सा बनाती हैं, जिसका बड़ा भाग विदेशों में निर्यात किया जाता है। टैक्स बढ़ने से कंपनी के मुनाफे (मार्जिन) पर सीधा असर पड़ेगा।
भ्रामक खबरों का खंडन: गिरावट के बीच कंपनी ने उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है जिनमें दावा किया गया था कि रिलायंस ईरान से कच्चा तेल खरीद रही है।
बाजार की सुस्ती और नायरा एनर्जी का प्रभाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब निजी क्षेत्र की कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने पेट्रोल के दाम ₹5 और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। डीलरों को डर है कि इस बढ़ोतरी से मांग घट सकती है और सप्लाई में कमी आ सकती है।
रिलायंस की इस गिरावट का असर पूरे बाजार पर दिखा:
सेंसेक्स और निफ्टी: दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 2% तक लुढ़क गए।
निवेशकों की चिंता: पिछले एक महीने में रिलायंस का शेयर करीब 3% गिर चुका है, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दबाव बढ़ गया है।
आर्थिक प्रभाव: एक नजर में
| श्रेणी | बदलाव / प्रभाव |
|---|---|
| RIL मार्केट कैप | ₹82,000 करोड़ की गिरावट |
| डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी | ₹21.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी |
| एटीएफ एक्सपोर्ट ड्यूटी | ₹29.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी |
| घरेलू पेट्रोल | ₹3 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी की कटौती |
निष्कर्ष: सरकार के इस रणनीतिक कदम ने एक तरफ घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी है, तो दूसरी तरफ तेल निर्यात करने वाली दिग्गज कंपनियों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में रिलायंस के शेयरों की चाल वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी नीतियों के तालमेल पर निर्भर करेगी।