पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संवैधानिक और रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वे फिलहाल मुख्यमंत्री के पद पर बने रहेंगे, लेकिन इस कदम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
सभापति ने की इस्तीफे की पुष्टि
बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री ने आज सुबह उनसे मुलाकात कर अपना त्यागपत्र सौंपा। सभापति ने कहा:
"मुख्यमंत्री ने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। अब संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत इस सीट को रिक्त घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी। सदन को उनके जैसे अनुभवी व्यक्तित्व के मार्गदर्शन की कमी खलेगी।"
रोहिणी आचार्या का तीखा हमला: 'चाचा जी ने जो बोया, वही पाया'
नीतीश कुमार के इस कदम पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया। उन्होंने इसे "ऑपरेशन फिनिश नीतीश" का नाम देते हुए कहा:
भाजपा ने अंततः नीतीश कुमार का इस्तीफा ले ही लिया।
कुर्सी के मोह में मुख्यमंत्री ने न केवल अपनी गरिमा खोई, बल्कि बिहार भी उनके हाथ से निकल गया।
यह उनके द्वारा लिए गए पिछले राजनीतिक निर्णयों का परिणाम है।
इस्तीफे के पीछे की राजनीतिक मंशा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का विधान परिषद से इस्तीफा देना किसी बड़ी आगामी योजना का हिस्सा हो सकता है। चर्चा है कि वे प्रत्यक्ष चुनाव (विधानसभा) के जरिए सदन में आने की तैयारी कर रहे हैं या फिर गठबंधन के भीतर समीकरणों को नया रूप देने की कोशिश में हैं।
फिलहाल, बिहार की सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह इस्तीफा नीतीश कुमार की व्यक्तिगत रणनीति है या भाजपा के बढ़ते प्रभाव का परिणाम।