दुबई/इस्लामाबाद। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 40 दिनों तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद बुधवार सुबह से प्रभावी हुए युद्धविराम (Ceasefire) ने दुनिया को राहत की सांस तो दी है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके जख्म गहरे हैं। ईरान के 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के तहत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया है, पर विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संकट इतनी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट: वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा
शांति काल में दुनिया के कुल तेल और गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध के दौरान इस रास्ते के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। हालांकि अब मार्ग खुल गया है, लेकिन जहाजों के संचालन को फिर से सामान्य होने में कम से कम दो हफ्तों का समय लगेगा, क्योंकि शिपिंग कंपनियां सुरक्षा के पुख्ता आश्वासन का इंतजार कर रही हैं।
तेल उत्पादन में आई बड़ी गिरावट: कुएं हुए बंद
जलमार्ग बंद होने के कारण खाड़ी देशों में तेल का भंडारण (Storage) अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंच गया था। टैंकरों की अनुपलब्धता के चलते उत्पादकों के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उन्होंने तेल के कुओं को बंद करना शुरू कर दिया।
तकनीकी चुनौती: विशेषज्ञों के अनुसार, बंद किए गए तेल के कुओं को दोबारा चालू करना 'स्विच दबाने' जितना आसान नहीं है। यह एक अत्यंत खर्चीली और जटिल तकनीकी प्रक्रिया है।
उत्पादन घाटा: पाइपलाइनों के जरिए सीमित आपूर्ति की कोशिशों के बावजूद, इस क्षेत्र में तेल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आम आदमी की जेब पर लंबा असर (2026-27)
भले ही युद्धविराम हो गया है, लेकिन आम जनता के लिए राहत की राह अभी दूर है। अर्थशास्त्रियों और कृषि विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है:
"ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान का वास्तविक असर किराने के सामान और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर पूरे वर्ष 2026 और 2027 तक बना रह सकता है।"
मरम्मत में लगेंगे कई साल
खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को युद्ध के दौरान भारी क्षति पहुंची है। नष्ट हुई सुविधाओं और रिफाइनरियों की मरम्मत करने और उन्हें युद्ध-पूर्व की स्थिति में लाने में उद्योग को कई साल लग सकते हैं।
वर्तमान में, सबकी नजरें इस्लामाबाद में होने वाली उच्च स्तरीय शांति वार्ता पर टिकी हैं, जहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस अस्थायी युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश करेंगे।