इस्लामाबाद वार्ता से पहले कूटनीतिक बिसात: एक तरफ शांति की मेज, दूसरी तरफ 50,000 अमेरिकी सैनिकों का पहरा

। इस्लामाबाद में होने वाली इस निर्णायक बैठक से पहले अमेरिका ने अपनी दोहरी रणनीति (Dual Policy) के तहत क्षेत्र में सैन्य जमावड़ा बढ़ा दिया है, वहीं ईरान ने वार्ता की मेज पर बैठने से पहले अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं।

11 Apr 2026  |  25

 

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित ऐतिहासिक शांति वार्ता से पहले पश्चिम एशिया का रणनीतिक परिदृश्य 'युद्ध और शांति' के दोराहे पर खड़ा है। इस्लामाबाद में होने वाली इस निर्णायक बैठक से पहले अमेरिका ने अपनी दोहरी रणनीति (Dual Policy) के तहत क्षेत्र में सैन्य जमावड़ा बढ़ा दिया है, वहीं ईरान ने वार्ता की मेज पर बैठने से पहले अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं।

अमेरिका की 'आर्म-ट्विस्टिंग' कूटनीति: 50,000 सैनिकों की तैनाती

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ईरान के साथ होने वाली बातचीत से ठीक पहले पेंटागन ने क्षेत्र में अपनी ताकत झोंक दी है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिका कूटनीति के साथ-साथ सैन्य दबाव की नीति पर काम कर रहा है:

सैन्य शक्ति: क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 40,000 से बढ़कर 50,000 के पार पहुंच गई है।

रणनीतिक तैनाती: 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों के साथ-साथ USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और 11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट खाड़ी की ओर अग्रसर हैं।

लक्ष्य: सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती ईरान के प्रमुख तेल केंद्र 'खार्ग द्वीप' जैसे रणनीतिक ठिकानों पर दबाव बनाने के लिए है।

ईरान की शर्त: "पहले लेबनान में युद्धविराम, फिर बात"

तेहरान से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं, इस्लामाबाद पहुंच चुका है। हालांकि, ईरान ने रुख कड़ा रखते हुए कहा है कि:

औपचारिक वार्ता शुरू होने से पहले लेबनान में पूर्ण युद्धविराम लागू होना चाहिए।

गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान सद्भावना के साथ आया है, लेकिन उसे वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं है। उन्होंने इसे 'धोखे की वार्ता' होने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

ट्रंप का अल्टीमेटम: 24 घंटे में होगा फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मिशन को लेकर सख्त लहजा अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि कूटनीति विफल होती है, तो युद्धपोत पूरी तरह तैयार हैं। ट्रंप के अनुसार, अगले 24 घंटे यह तय कर देंगे कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी या भीषण संघर्ष की ओर।

विशेषज्ञों की राय: 50,000 सैनिकों की संख्या किसी बड़े जमीनी युद्ध के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन यह ईरान के आर्थिक गलियारों और तेल आपूर्ति को बाधित करने के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और सामरिक दबाव है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक चिंता

छह हफ्तों से जारी इस तनाव ने दुनिया की 20% तेल आपूर्ति वाले रास्ते 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को अस्थिर कर दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रही है। इस्लामाबाद वार्ता की सफलता न केवल इस जलमार्ग को सुरक्षित करेगी, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी बड़ी राहत देगी।

अब पूरी दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद के उस बंद कमरे पर टिकी हैं, जहां जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली बातचीत पश्चिम एशिया का भविष्य तय करेगी।

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