वैक अश्विशांति के बीच भारत का ‘मिशन सुरक्षा’: जयशंकर UAE में, तो विदेश सचिव मिसरी यूरोप के मोर्चे पर तैनात

ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए चौतरफा कूटनीतिक घेराबंदी शुरू कर दी है। एक ओर विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को पुख्ता कर रहे हैं, वहीं विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के बाद अब यूरोप के दो सबसे शक्तिशाली देशों—फ्रांस और जर्मनी—के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं।

11 Apr 2026  |  22

 

नई दिल्ली/दुबई। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और अस्थिरता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए चौतरफा कूटनीतिक घेराबंदी शुरू कर दी है। एक ओर विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को पुख्ता कर रहे हैं, वहीं विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के बाद अब यूरोप के दो सबसे शक्तिशाली देशों—फ्रांस और जर्मनी—के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं।

यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में हो रही है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम वार्ता का निर्णायक दौर चल रहा है।

विदेश सचिव का यूरोप दौरा: ऊर्जा और रक्षा पर केंद्रित

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के बाद, विदेश सचिव विक्रम मिसरी अब पेरिस और बर्लिन में भारत का पक्ष रखेंगे।

फ्रांस (पेरिस): यहाँ मिसरी ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और एआई (AI) जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर चर्चा होगी।

जर्मनी (बर्लिन): जर्मनी में फोकस हरित ऊर्जा (Green Energy), व्यापार निवेश और तकनीक हस्तांतरण पर रहेगा।

UAE में जयशंकर: 'एनर्जी मिशन' की कमान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का UAE दौरा भारत की तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। भारत का लक्ष्य है कि युद्ध की स्थिति में भी देश को महंगी ऊर्जा की मार न झेलनी पड़े और आपूर्ति की निरंतरता बनी रहे।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह कूटनीति?

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह 'दोहरी रणनीति' तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है:

ऊर्जा सुरक्षा: खाड़ी देशों पर निर्भरता को सुरक्षित करना और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत तलाशना।

रणनीतिक संतुलन: अमेरिका के नए प्रशासन के साथ तालमेल बिठाते हुए यूरोप के पुराने मित्रों (फ्रांस-जर्मनी) के साथ रिश्तों को नया विस्तार देना।

आर्थिक स्थिरता: होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे व्यापारिक मार्गों पर तनाव का असर भारतीय व्यापार और निवेश पर न पड़ने देना।

महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि: यह दौरा हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्राओं के दौरान बने रोडमैप को जमीन पर उतारने का एक बड़ा अवसर है।

निष्कर्ष: भारत इस समय एक 'ग्लोबल ब्रिज' की भूमिका में है। जहाँ वह एक ओर अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर नजर रखे हुए है, वहीं दूसरी ओर अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने के लिए दुनिया की महाशक्तियों के साथ सक्रिय संवाद कर रहा है।

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