खड़गपुर/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में हुई भारी कटौती ने राज्य का सियासी पारा गरमा दिया है। खड़गपुर सदर सीट से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने एक विवादित बयान देते हुए कहा है कि मतदाता सूची (SIR) से जिन 90.8 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे सभी 'राष्ट्र-विरोधी' थे।
घोष का यह बयान उस समय आया है जब चुनाव आयोग ने फर्जी मतदाताओं की छंटनी के लिए एक व्यापक अभियान चलाया है।
"अभी 10-15 लाख नाम और हटेंगे"
खड़गपुर के टालीबागीचा इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान दिलीप घोष ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन्हीं फर्जी मतदाताओं के दम पर सत्ता में बनी रही।
बड़ा दावा: घोष ने कहा कि 90 लाख नाम तो हट चुके हैं, लेकिन आने वाले दिनों में 10 से 15 लाख और संदिग्ध नाम हटाए जा सकते हैं।
फर्जी वोटर का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम ने 34 साल और ममता बनर्जी ने तीन बार मुख्यमंत्री बनने के लिए इन 'फर्जी' वोटों का सहारा लिया।
खुद की सीट पर 57 हजार वोट कटे
दिलचस्प बात यह है कि जिस खड़गपुर सदर निर्वाचन क्षेत्र से दिलीप घोष चुनाव लड़ रहे हैं, वहां के कुल 2,30,000 मतदाताओं में से 57,000 से अधिक नाम सूची से गायब हैं। टालीबागीचा जैसे हिंदू शरणार्थी बाहुल्य क्षेत्रों में भी भारी कटौती देखी गई है।
"जिसके पास सही दस्तावेज हैं, उसका नाम लिस्ट में जरूर आएगा। चुनाव आयोग ने पानी निचोड़ने की तरह इन फर्जी नामों को बाहर कर दिया है।" — दिलीप घोष, भाजपा उम्मीदवार
TMC का पलटवार: "57 लाख हिंदुओं को देशद्रोही कहा"
दिलीप घोष के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। खड़गपुर से टीएमसी उम्मीदवार प्रदीप सरकार ने कहा कि घोष के बयान ने भाजपा का असली चेहरा उजागर कर दिया है।
जातीय समीकरण पर सवाल: सरकार ने दावा किया कि हटाए गए 90 लाख नामों में से करीब 57 लाख हिंदू हैं।
गंभीर आरोप: टीएमसी ने सवाल किया कि क्या भाजपा उन लाखों हिंदुओं को भी 'राष्ट्र-विरोधी' या 'रोहिंग्या' मानती है जिनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं?
बंगाल चुनाव 2026: चुनावी कार्यक्रम
राज्य की 294 सीटों पर दो चरणों में मतदान होना है:
पहला चरण: 23 अप्रैल (152 सीटें)
दूसरा चरण: 29 अप्रैल (142 सीटें)
परिणाम: 4 मई 2026
निष्कर्ष: मतदाता सूची से नामों का हटना इस बार बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। जहां भाजपा इसे 'स्वच्छ लोकतंत्र' की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'वैध मतदाताओं' के अधिकार छीनने की साजिश करार दे रहा है।