इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की ऐतिहासिक 'शांति वार्ता' शुरू: ट्रंप ने ईरान को बताया 'असफल देश', दी 'रीसेट' की चेतावनी

इस वक्त इस्लामाबाद (पाकिस्तान) वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहाँ दशकों की कड़वाहट के बाद अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को लेकर न केवल उम्मीद जताई है, बल्कि एक सख्त चेतावनी भी दी है।

11 Apr 2026  |  28

 

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन, 11 अप्रैल 2026: वैश्विक तनाव के बीच आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता का औपचारिक आगाज हो गया। इस ऐतिहासिक संवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक कड़ा बयान जारी किया है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में ईरान को 'असफल देश' (Failing Nation) करार दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वे बातचीत के जरिए 'डी-एस्केलेशन' के लिए तैयार हैं।

इस्लामाबाद में कौन-कौन है मौजूद?

यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच अब तक की सबसे उच्च स्तरीय बातचीत मानी जा रही है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल: इसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर भी शामिल हैं।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल: ईरान की ओर से संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची बातचीत की मेज पर हैं।

मध्यस्थ की भूमिका: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस त्रिपक्षीय संवाद में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की नजरें तेल सप्लाई पर

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी पहली प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खुलवाना है। युद्ध के कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। ट्रंप ने कहा कि वे इस रास्ते को "ईरान के सहयोग के साथ या उसके बिना" भी खोलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान ने युद्ध के दौरान जो 'माइन्स' (Mines) बिछाई थीं, उन्हें लोकेट करने में हो रही देरी की वजह से रास्ता खुलने में अड़चन आ रही है।

वार्ता की शर्तें और चुनौतियां

ईरान ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं:

लेबनान में तत्काल सीजफायर (जहाँ इजरायली हमले जारी हैं)।

अमेरिका द्वारा रोकी गई (Blocked) ईरानी संपत्तियों को जारी करना।

दूसरी ओर, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

ट्रंप की 'रीसेट' चेतावनी

अपने स्वभाव के अनुरूप, ट्रंप ने नरमी के साथ सख्ती भी दिखाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान बातचीत में गंभीरता नहीं दिखाता है, तो अमेरिका हालात को 'रीसेट' करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि ईरान के पास अब कोई पत्ता (Card) नहीं बचा है और वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का उपयोग कर दुनिया को डराने की कोशिश न करे।

विशेष दृष्टिकोण: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने उम्मीद जताई है कि यह वार्ता क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी। हालांकि, लेबनान संकट और परमाणु कार्यक्रम जैसे पेचीदा मुद्दों के कारण इस वार्ता की राह आसान नहीं दिख रही है। दुनिया भर की नजरें अब इस्लामाबाद से निकलने वाले अगले 48 घंटों के फैसलों पर टिकी हैं।

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