नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र से पहले प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक संशोधन को सर्वसम्मति से पारित करने का आह्वान किया है। पीएम ने स्पष्ट किया है कि विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब अनिवार्य है।
2029 का लक्ष्य: 2034 तक का इंतजार खत्म
वर्तमान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के प्रावधानों के अनुसार, आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू हो सकता था, जिससे यह प्रक्रिया 2034 तक खिंच सकती थी। लेकिन सरकार अब इसमें संशोधन कर इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से ही प्रभावी बनाना चाहती है।
बड़ा बदलाव: सरकार कानून में संशोधन कर जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्त में ढील दे सकती है।
सीटों का गणित: यदि यह लागू होता है, तो लोकसभा की प्रभावी क्षमता 816 तक पहुंच सकती है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
पीएम का संदेश: "समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें। 2029 के चुनावों में इसे लागू करना देश की आवश्यकता है।"
संसद में 'शक्ति प्रदर्शन': भाजपा का व्हिप और सख्त निर्देश
सत्र की गंभीरता को देखते हुए भाजपा ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए तीन-लाइन का व्हिप जारी किया है।
अनिवार्य उपस्थिति: 16 से 18 अप्रैल तक सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों का सदन में रहना अनिवार्य है।
छुट्टी पर रोक: इस विशेष सत्र के दौरान किसी भी सदस्य को अवकाश की अनुमति नहीं दी गई है।
विपक्ष के सवाल और तीखी प्रतिक्रिया
जहाँ एक ओर सरकार इसे 'ऐतिहासिक कदम' बता रही है, वहीं विपक्ष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं:
मल्लिकार्जुन खरगे का हमला: कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बिना चर्चा के इस बड़े बदलाव को थोप रही है। उन्होंने परिसीमन और संवैधानिक बारीकियों पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक की मांग की है।
समय पर सवाल: कुछ विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह आगामी चुनावों को देखते हुए लिया गया एक राजनीतिक निर्णय है, जिस पर गहन विचार-विमर्श की जरूरत है।
क्यों खास है यह विशेष सत्र?
| सत्र की अवधि | 16 - 18 अप्रैल 2026 |
|---|---|
| मुख्य एजेंडा | नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन |
| उद्देश्य | 2029 चुनाव से 33% आरक्षण सुनिश्चित करना |
| संभावित बदलाव | लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचना |
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निष्कर्ष: 16 अप्रैल से शुरू हो रहा यह सत्र भारतीय लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि संशोधन पारित होता है, तो 2029 का चुनाव देश की आधी आबादी के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व की एक नई सुबह लेकर आएगा। फिलहाल, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्ष सरकार की इस अपील पर साथ आएगा या सदन में हंगामे के आसार रहेंगे।