बिहार की सियासत में 'निशांत' दस्तक: पटना की सड़कों पर लगे पोस्टर— "नीतीश का मिशन अधूरा, निशांत करेंगे पूरा"

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच, जदयू कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सूबे की कमान सौंपने की मांग बुलंद कर दी है। पटना के प्रमुख चौराहों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

12 Apr 2026  |  17

 

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर 'उत्तराधिकार' की बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच, जदयू कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सूबे की कमान सौंपने की मांग बुलंद कर दी है। पटना के प्रमुख चौराहों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

पोस्टर वॉर: "न दंगा-फसाद, न बुलडोजर बवाल चाहिए"

पटना की सड़कों पर लगे इन पोस्टरों में निशांत कुमार को 'नेक्स्ट सीएम ऑफ बिहार' और 'युवा जनसेवक' के रूप में पेश किया गया है। पोस्टरों पर लिखे नारे सीधे तौर पर भाजपा की कार्यशैली पर तंज और नीतीश की विरासत पर दावेदारी पेश कर रहे हैं:

"बिहार में ना तो बुलडोजर बवाल और ना ही दंगा-फसाद चाहिए... हे लोकनाथ, अब आपकी परछाईं स्वरूप युवा जनसेवक निशांत कुमार चाहिए।"

पोस्टर में यह भी संदेश दिया गया है कि "मिशन विकसित बिहार-2040" को केवल निशांत कुमार ही पूरा कर सकते हैं।

नीतीश का मार्गदर्शन और संजय झा की सफाई

जहां एक ओर कार्यकर्ता निशांत कुमार के नाम के नारे लगा रहे हैं, वहीं जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि आगामी सरकार भले ही नई हो, लेकिन वह नीतीश कुमार की नीतियों और विचारों पर ही चलेगी।

नीतीश का लगाव: संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार भले ही दिल्ली में संसद सत्र के लिए जाएं, लेकिन उनका दिल बिहार में ही रहेगा और नई सरकार को उनका निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

ईमानदारी की मिसाल: विरोधियों पर निशाना साधते हुए झा ने कहा कि नीतीश कुमार ने 20 साल तक ईमानदारी से सेवा की है। आज भी उनके पास दिल्ली में मात्र दो कमरों का एक मकान है। उन्होंने अपने खून-पसीने से पार्टी बनाई है, जिसे जनता के दिल से निकालना असंभव है।

क्या भाजपा की बढ़ेगी दावेदारी?

नीतीश कुमार के राज्यसभा में शपथ लेने के बाद यह माना जा रहा था कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी (BJP) से हो सकता है। हालांकि, जदयू समर्थकों द्वारा निशांत कुमार के नाम को आगे बढ़ाना यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा सत्ता की चाबी नीतीश परिवार के पास ही रखना चाहता है।

कौन हैं निशांत कुमार?

नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार अब तक सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूर रहे हैं। उन्हें शांत स्वभाव का माना जाता है और वे लाइमलाइट से बचते आए हैं। लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं का उन्हें 'नीतीश की परछाईं' बताना बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है।

निष्कर्ष: क्या निशांत कुमार अपने पिता की विरासत संभालने के लिए सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगे या यह केवल समर्थकों का उत्साह मात्र है? फिलहाल, इन पोस्टरों ने बिहार की सत्ता के समीकरणों को और अधिक पेचीदा बना दिया है।

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