नई दिल्ली/गुवाहाटी | मुख्य संवाददाता कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली कानूनी राहत के खिलाफ अब असम सरकार ने देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा खेड़ा को दी गई ट्रांजिट अग्रिम जमानत को असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस कानूनी कदम के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री' करार दिया है।
राहुल गांधी का पलटवार: "सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं सीएम"
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक कड़ा संदेश साझा करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा:
भ्रष्टाचार का आरोप: "असम के मौजूदा मुख्यमंत्री देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं। वे कानून की पकड़ से लंबे समय तक बच नहीं पाएंगे।"
संविधान का उल्लंघन: राहुल ने आरोप लगाया कि सीएम अपने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को परेशान करने के लिए सरकारी मशीनरी और सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
पार्टी का समर्थन: उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी कांग्रेस पार्टी पवन खेड़ा के साथ खड़ी है और वे ऐसी "डराने वाली राजनीति" से पीछे नहीं हटेंगे।
क्या है पूरा कानूनी विवाद?
यह मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी शर्मा के खिलाफ पवन खेड़ा द्वारा की गई कथित टिप्पणियों से जुड़ा है, जिसके बाद असम में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
तेलंगाना हाई कोर्ट की राहत: हाल ही में तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में पेश हो सकें।
असम सरकार की दलील: असम सरकार ने इस जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि खेड़ा ने हैदराबाद (तेलंगाना) में याचिका क्यों दायर की? सरकार के अनुसार, उन्हें असम आकर ही जमानत के लिए आवेदन करना चाहिए था।
हाई कोर्ट का रुख बनाम सरकार की चुनौती
| पक्ष | तर्क / आधार |
|---|---|
| तेलंगाना हाई कोर्ट | अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत कोर्ट आरोपी को सक्षम अदालत तक पहुंचने के लिए सीमित समय की ट्रांजिट जमानत दे सकता है। |
| असम सरकार | याचिकाकर्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह असम की अदालत में आवेदन क्यों नहीं कर सकते। क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के आधार पर इसे चुनौती दी गई है। |
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सियासी पारा हाई: जांच और पारदर्शिता की मांग
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि सत्ता की जवाबदेही और पारदर्शिता लोकतंत्र के आधार हैं। उन्होंने मांग की कि जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
निष्कर्ष: पवन खेड़ा का यह मामला अब एक बड़ी कानूनी लड़ाई के साथ-साथ एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक जंग बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार की इस याचिका पर होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या राजनीतिक बयानों से जुड़े मामलों में ट्रांजिट रिलीफ के नियम और सख्त होंगे या नहीं।