किसान संकट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र को नोटिस जारी, MSP और 'C2' लागत फार्मूले पर माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने ने उस याचिका पर विचार करने का निर्णय लिया है, जिसमें मांग की गई है कि सरकार किसानों को विभिन्न फसलों के लिए कम से कम 'भारित औसत उत्पादन लागत' (Weighted Average Cost of Production) के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान और खरीद सुनिश्चित करे। याचिका में याद दिलाया गया कि 2006 की एम.एस. स्वामीनाथन समिति ने सिफारिश की थी कि खेती को व्यावहारिक बनाने के लिए किसानों को उनकी कुल लागत पर 50% लाभ मिलना चाहिए।

13 Apr 2026  |  44

 

नई दिल्ली | भारत के कृषि क्षेत्र में गहराते वित्तीय संकट और किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायालय ने उस याचिका पर विचार करने का निर्णय लिया है, जिसमें मांग की गई है कि सरकार किसानों को विभिन्न फसलों के लिए कम से कम 'भारित औसत उत्पादन लागत' (Weighted Average Cost of Production) के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान और खरीद सुनिश्चित करे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

प्रमुख कानूनी दलीलें: C2 लागत और स्वामीनाथन रिपोर्ट

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, चेरिल डिसूजा और शियास के.आर. ने अदालत के समक्ष किसानों की दयनीय स्थिति का खाका पेश किया। याचिका की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

स्वामीनाथन आयोग की अनदेखी: याचिका में याद दिलाया गया कि 2006 की एम.एस. स्वामीनाथन समिति ने सिफारिश की थी कि खेती को व्यावहारिक बनाने के लिए किसानों को उनकी कुल लागत पर 50% लाभ मिलना चाहिए।

C2 लागत का मुद्दा: याचिका के अनुसार, वर्तमान MSP सरकार द्वारा निर्धारित की जाने वाली व्यापक लागत यानी C2 (जिसमें बीज, उर्वरक, पारिवारिक श्रम, भूमि का किराया और पूंजी पर ब्याज शामिल है) से काफी कम है।

अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: पर्याप्त मूल्य न मिलने के कारण किसान कर्ज के जाल में फंस रहे हैं, जिसे याचिका में उनके 'जीवन के अधिकार' (Article 21) का हनन बताया गया है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: संकट की एक नई वजह?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते पर भी गंभीर चिंता जताई।

दलील दी गई कि इस समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों को बिना किसी आयात शुल्क (Import Duty) के भारत में आने की अनुमति दी गई है।

चूंकि अमेरिकी किसानों को वहां की सरकार से भारी सब्सिडी मिलती है, इसलिए भारतीय किसानों के लिए उनसे प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो गया है। इससे घरेलू बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमतें और गिर गई हैं।

आत्महत्याओं के आंकड़े और बाजार का असंतुलन

न्यायालय को सूचित किया गया कि अकेले महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों में 17,000 किसानों ने आत्महत्या की है। याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार का गेहूं और चावल की खरीद पर एकाधिकार है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त अनाज वितरण एक सराहनीय कदम है, लेकिन इससे खुले बाजार की मांग प्रभावित हुई है। यदि सरकार लागत मूल्य पर खरीद नहीं करती, तो किसानों के पास अपनी उपज बेचने का कोई अन्य विकल्प नहीं बचता।

मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी: > सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक व्यवहारिक पहलू की ओर इशारा करते हुए कहा, "जब हम सभी किसानों के लिए एक समान नीति की बात करते हैं, तो हमें यह भी देखना होगा कि कुछ किसानों के पास भूमि के बहुत बड़े हिस्से हैं।"

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस याचिका पर सुनवाई का निर्णय किसानों के लिए न्याय की एक नई उम्मीद लेकर आया है। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं कि वह MSP निर्धारण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के बीच किसानों के हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित करती है।

अन्य खबरें