नोएडा श्रमिक आंदोलन पर 'सियासी संग्राम': विपक्षी एकजुटता बनाम 'विदेशी साजिश' का दावा, 2027 के चुनाव पर टिकी नजरें

श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने श्रमिकों की कम मजदूरी और खराब कामकाजी परिस्थितियों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। अनिल राजभर ने दावा किया कि इस आंदोलन के तार पाकिस्तान के 'हैंडलर्स' से जुड़े हो सकते हैं।

14 Apr 2026  |  23

 

नोएडा/लखनऊ | नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में 40,000 से अधिक श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रही हैं, वहीं राज्य सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे 'पाकिस्तानी हैंडलर्स' और 'गहरी साजिश' का अंदेशा जताया है।

विपक्ष का प्रहार: "विफल सरकार और 'विकसित भारत' का सच"

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने श्रमिकों की कम मजदूरी और खराब कामकाजी परिस्थितियों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

अखिलेश यादव: उन्होंने इसे सरकार की विफलता बताते हुए कहा, "सरकार को इन प्रदर्शनों की जानकारी थी, फिर भी इसे होने दिया गया। यदि यह साजिश है, तो मुख्यमंत्री और भाजपा इसके लिए जिम्मेदार हैं।" उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में भाजपा की विदाई तय है।

राहुल गांधी: राहुल गांधी ने सोशल मीडिया (X) पर आंकड़ों के साथ प्रहार किया। उन्होंने कहा कि नोएडा में एक श्रमिक की औसत आय 12,000 रुपये है, जबकि महंगाई के इस दौर में किराया ही 4,000 से 7,000 रुपये तक है। उन्होंने इसे 'विकसित भारत' की कड़वी सच्चाई बताया।

अजय राय (कांग्रेस): यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की निंदा की और गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई की मांग की।

सरकार का पलटवार: "पाकिस्तान और अल्ट्रा-लेफ्ट का हाथ"

उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को 'पूर्व-नियोजित साजिश' करार दिया है।

अनिल राजभर (श्रम मंत्री): उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन के तार पाकिस्तान के 'हैंडलर्स' से जुड़े हो सकते हैं। सरकार ने अपील की है कि श्रमिक अराजक तत्वों के बहकावे में न आएं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि औद्योगिक अशांति पैदा करने वालों से सावधान रहें। उन्होंने उद्यमियों को श्रमिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की सलाह दी।

लक्ष्मी सिंह (नोएडा पुलिस कमिश्नर): पुलिस ने अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि व्हाट्सएप ग्रुपों और भड़काऊ संदेशों के जरिए इसे संगठित किया गया था। इसमें 'अल्ट्रा-लेफ्ट' तत्वों के शामिल होने और विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है।

वेतन वृद्धि और सरकारी कदम

विवाद के बीच, यूपी सरकार ने अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि की घोषणा की है। 1 अप्रैल से प्रभावी नई दरें (गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद के लिए) इस प्रकार हैं:

अकुशल श्रमिक: ₹13,690

अर्ध-कुशल श्रमिक: ₹15,059

कुशल श्रमिक: ₹16,868

2027 का लिटमस टेस्ट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नोएडा का यह आंदोलन विपक्षी दलों के लिए भाजपा के गढ़ (उत्तर प्रदेश) में सेंध लगाने का एक बड़ा अवसर बन गया है। इस साल होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले, श्रमिकों का यह गुस्सा सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

मुख्य अपडेट:

नोएडा के 80 स्थानों पर हुई झड़पों में 40,000 से अधिक श्रमिक शामिल थे।

पुलिस ने 6 मुख्य आगजनी करने वालों सहित 300 गिरफ्तारियां की हैं।

इंटरनेशनल सप्लाई चेन की बाधाओं और वैश्विक महंगाई को भी इस असंतोष का एक कारण माना जा रहा है।

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