MSP पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस: राज्यों द्वारा सुझाई गई 'खेती की वास्तविक लागत' पर माँगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और 'कृषि लागत एवं मूल्य आयोग' (CACP) को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया माँगी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। इस याचिका में मांग की गई है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करते समय राज्यों द्वारा प्रस्तावित 'खेती की वास्तविक लागत' को उचित महत्व दिया जाए।

14 Apr 2026  |  28

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। इस याचिका में मांग की गई है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करते समय राज्यों द्वारा प्रस्तावित 'खेती की वास्तविक लागत' को उचित महत्व दिया जाए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और 'कृषि लागत एवं मूल्य आयोग' (CACP) को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया माँगी है।

क्या हैं याचिका की मुख्य मांगें?

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इसे देश के किसानों से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित निर्देश देने की मांग की गई है:

सटीक लागत पर आधारित MSP: अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए कि सभी अधिसूचित फसलों की खरीद उस MSP पर हो, जिसकी गणना खेती की वास्तविक लागत (Exact cost of cultivation) के आधार पर की गई हो।

पूर्ण खरीद की गारंटी: सरकार उन सभी किसानों से फसल की पूरी खरीद सुनिश्चित करे जो अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के इच्छुक हैं।

राज्यों के प्रस्तावों को वेटेज: MSP निर्धारण की प्रक्रिया में राज्यों द्वारा भेजे गए खेती की लागत के आंकड़ों को नजरअंदाज न कर उन्हें प्राथमिकता दी जाए।

क्यों अहम है यह कदम?

वर्तमान में, किसानों की एक बड़ी मांग यह रही है कि MSP को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप खेती की व्यापक लागत (C2+50%) के आधार पर तय किया जाए। याचिका में राज्यों के इनपुट को शामिल करने की बात कही गई है, क्योंकि हर राज्य में भौगोलिक और संसाधनों के आधार पर खेती की लागत अलग-अलग होती है।

सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब केंद्र सरकार और CACP को यह स्पष्ट करना होगा कि वे MSP निर्धारण के लिए वर्तमान में किन मापदंडों का उपयोग कर रहे हैं और इसमें राज्यों की भूमिका कितनी प्रभावी है।

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