भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' के निर्माण के लिए इसरो ने बढ़ाया रूस की ओर दोस्ती का हाथ , 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा भारत

इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स के निदेशक ए. पकीराज ने सम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया कि भारत, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के विकास में रूस के दशकों पुराने अनुभवों का लाभ उठाना चाहता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने वर्ष 2035 तक अपने स्वयं के स्पेस स्टेशन, 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (BAS), को हकीकत बनाने के लिए रूस के साथ साझेदारी की गहरी इच्छा जताई है।

15 Apr 2026  |  25

अंतरिक्ष में नई इबारत: 

मॉस्को/बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने वर्ष 2035 तक अपने स्वयं के स्पेस स्टेशन, 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (BAS), को हकीकत बनाने के लिए रूस के साथ साझेदारी की गहरी इच्छा जताई है। मॉस्को में आयोजित एक प्रमुख अंतरिक्ष मंच पर इसरो के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस महत्वाकांक्षी मिशन में रूसी विशेषज्ञता को शामिल करने का प्रस्ताव रखा।

रूस के अनुभव से संवरेगा भारत का स्टेशन

इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स के निदेशक ए. पकीराज ने सम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया कि भारत, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के विकास में रूस के दशकों पुराने अनुभवों का लाभ उठाना चाहता है। उन्होंने सहयोग के लिए कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों को रेखांकित किया:

कंट्रोल सिस्टम और पावर सप्लाई: स्टेशन के संचालन और ऊर्जा प्रबंधन में संयुक्त प्रयास।

कम्युनिकेशन और ट्रैकिंग: अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच निर्बाध संचार स्थापित करना।

डॉकिंग सिस्टम: अंतरिक्ष यानों को स्टेशन से जोड़ने की जटिल तकनीक।

2035 का लक्ष्य: पृथ्वी से 450 किमी ऊपर होगा ठिकाना

भारत का प्रस्तावित स्पेस स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में करीब 450 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। इसकी तकनीकी विशेषताओं के बारे में कुछ मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

झुकाव (Inclination): इसका झुकाव 51.6 डिग्री होगा, जो इसे रूसी स्पेस स्टेशन 'आरओएस' (ROS) के समान बनाता है।

वैश्विक परिदृश्य: वर्तमान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) को 2030-31 तक सेवामुक्त किए जाने की योजना है। ऐसे में भारत का यह स्टेशन वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग के लिए नए द्वार खोलेगा। फिलहाल केवल चीन के पास एक सक्रिय मानवयुक्त स्पेस स्टेशन है।

दशकों पुराना अटूट विश्वास: भारत-रूस अंतरिक्ष संबंध

भारत और रूस (पूर्व सोवियत संघ) के बीच अंतरिक्ष साझेदारी का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है:

आर्यभट (1975): भारत के पहले उपग्रह का प्रक्षेपण सोवियत संघ की मदद से हुआ था।

राकेश शर्मा (1984): पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने सोवियत मिशन के तहत ही अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

गगनयान और क्रायोजेनिक तकनीक: हाल ही में रूस ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण और जटिल इंजन तकनीकों में इसरो की महत्वपूर्ण सहायता की है।

रणनीतिक मजबूती का आधार

यह संभावित साझेदारी दोनों देशों के बीच ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक संबंधों’ को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो रूस का 'Mir' स्टेशन और ISS का अनुभव भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा के साथ मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया अध्याय लिखेगा।

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