मोहाली/खरड़ | खरड़ स्थित 'सुख सेवा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल' में हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले ने अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का रूप ले लिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस काले कारोबार की जड़ें पड़ोसी देश नेपाल तक फैली हुई हैं, जहाँ से निर्दोष लोगों को पैसों का लालच देकर तस्करी के जाल में फंसाया जा रहा है।
नेपाल की महिला एजेंट ने बुना था साजिश का ताना-बाना
जांच में सामने आया है कि डोनर आशीष थमन को नेपाल में एक महिला एजेंट ने अपने जाल में फंसाया था। लाखों रुपये का लालच देकर उसे दिल्ली निवासी वरिंदरपाल को किडनी देने के लिए तैयार किया गया। डोनर को पूरी व्यवस्था के साथ खरड़ लाया गया, जहाँ अवैध रूप से उसकी किडनी निकालकर रिसीवर को प्रत्यारोपित कर दी गई। हैरान करने वाली बात यह है कि ऑपरेशन के बाद भी डोनर को वादे के मुताबिक कोई भुगतान नहीं किया गया।
अस्पताल के पास नहीं थी ट्रांसप्लांट की अनुमति
सिविल सर्जन संगीता जैन ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि संबंधित निजी अस्पताल के पास किडनी ट्रांसप्लांट करने का कोई आधिकारिक लाइसेंस या अनुमति नहीं थी।
"नियमों के अनुसार, किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी के लिए स्वास्थ्य विभाग से पूर्व अनुमति अनिवार्य है, लेकिन इस अस्पताल ने विभाग को किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी थी।" — संगीता जैन, सिविल सर्जन
मुख्य आरोपित डॉक्टर का पुराना आपराधिक इतिहास
इस मामले में मुख्य आरोपित डॉक्टर मनप्रीत कौर और उनकी माँ सरबजीत कौर का इतिहास संदिग्ध रहा है:
2018: अवैध गर्भपात के मामले में कार्रवाई हुई।
2024: खरड़ क्षेत्र में लिंग जांच रैकेट में नाम सामने आया।
वर्तमान: अब अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी रैकेट में संलिप्तता।
SIT गठित, कई राज्यों में छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए मोहाली पुलिस ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जिसमें एसपी मनप्रीत सिंह, डीएसपी कर्ण संधू और एसएचओ अमरिंदर सिंह शामिल हैं। पुलिस ने गुजरात के महेंद्र कुमार और राजस्थान के राकेश कुमार को भी गिरफ्तार किया है, जो अस्पताल में अटेंडेंट बनकर इस रैकेट को संचालित कर रहे थे।
वर्तमान स्थिति
डोनर: आशीष थमन को चंडीगढ़ पीजीआई के वार्ड में भर्ती किया गया है।
रिसीवर: वरिंदरपाल पीजीआई के आईसीयू में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
जांच: पुलिस अब उन बाहरी विशेषज्ञों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया।
निष्कर्ष: पुलिस को अंदेशा है कि यह केवल एक केस नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह है जिसके तार भारत के कई राज्यों और विदेशों से जुड़े हैं। जल्द ही इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।