लाहौर में लश्कर के सह-संस्थापक आमिर हमजा पर जानलेवा हमला; अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल

लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सह-संस्थापक और हाफिज सईद के सबसे करीबी सहयोगी आमिर हमजा पर लाहौर में जानलेवा हमला हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला उस वक्त हुआ जब हमजा लाहौर स्थित एक न्यूज़ चैनल के दफ्तर से बाहर निकल रहा था।

16 Apr 2026  |  6

 

लाहौर: पाकिस्तान के आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र को एक और बड़ा झटका लगा है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सह-संस्थापक और हाफिज सईद के सबसे करीबी सहयोगी आमिर हमजा पर लाहौर में जानलेवा हमला हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, अज्ञात बंदूकधारियों ने एक समाचार चैनल के कार्यालय के बाहर हमजा को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ गोलीबारी की। वह फिलहाल अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है।

हमले का घटनाक्रम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला उस वक्त हुआ जब हमजा लाहौर स्थित एक न्यूज़ चैनल के दफ्तर से बाहर निकल रहा था। घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उस पर गोलियां बरसाईं और मौके से फरार हो गए। हमले के तुरंत बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बताई है।

कौन है आमिर हमजा? (आतंक का 'विचारक' चेहरा)

आमिर हमजा को लश्कर-ए-तैयबा के सबसे पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। उसकी भूमिका को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

लश्कर की नींव: 1959 में जन्मे हमजा ने 1985-86 के दौरान हाफिज सईद के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना की थी। उसे संगठन का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

वैश्विक आतंकी: भारत सहित दुनिया भर में आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण अमेरिका ने उसे 'वैश्विक आतंकवादी' घोषित कर रखा है।

बौद्धिक प्रचारक: वह केवल एक रणनीतिकार ही नहीं, बल्कि लश्कर का मुख्य विचारक भी रहा है। एक प्रभावशाली वक्ता और लेखक के रूप में उसने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई। उसने संगठन के आधिकारिक प्रकाशनों का संपादन किया और 'काफिला दावत और शहादत' जैसी कई किताबें भी लिखीं।

रणनीतिक पैंतरेबाजी और फंडिंग का जाल

2018 में जब पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण 'जमात-उद-दावा' और 'फलाह-ए-इंसानियत' जैसे संगठनों पर कार्रवाई की, तो हमजा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत खुद को लश्कर से अलग कर लिया था।

नया मुखौटा: लश्कर से दूरी दिखाने के बाद उसने 'जैश-ए-मनकफा' नामक एक नया गुट तैयार किया। हालांकि, इसका असली मकसद लश्कर के लिए फंड जुटाना ही था। इस धन का इस्तेमाल मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में आतंकी हमलों को वित्तपोषित करने के लिए किया जाता रहा है।

पाकिस्तान में बढ़ता 'अज्ञात' हमलावरों का खौफ

हाल के महीनों में पाकिस्तान के भीतर भारत विरोधी आतंकियों पर होने वाले हमलों में तेजी आई है। आमिर हमजा पर हुआ यह हमला इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने पाकिस्तानी खुफिया तंत्र और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुटी हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।

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