भारत-पाकिस्तान सीमा पर अभेद्य हुई सुरक्षा; गुरदासपुर के कलानौर में 'स्मार्ट फेंसिंग' का सुरक्षा कवच तैयार

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अत्याधुनिक स्मार्ट फेंसिंग लगाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। गुरदासपुर के कलानौर सेक्टर में लगाई जा रही यह नई बाड़ न केवल घुसपैठ और तस्करी जैसी देश विरोधी गतिविधियों पर लगाम कसेगी, बल्कि सीमावर्ती खेती के स्वरूप को भी बदल रही है।

16 Apr 2026  |  20

 

कलानौर (गुरदासपुर): देश की पश्चिमी सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करने के मिशन के तहत भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अत्याधुनिक स्मार्ट फेंसिंग लगाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। गुरदासपुर के कलानौर सेक्टर में लगाई जा रही यह नई बाड़ न केवल घुसपैठ और तस्करी जैसी देश विरोधी गतिविधियों पर लगाम कसेगी, बल्कि सीमावर्ती खेती के स्वरूप को भी बदल रही है।

नई फेंसिंग की विशेषताएं: क्यों है यह 'स्मार्ट'?

केंद्र सरकार द्वारा पंजाब की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए विशेष तकनीक वाली कंटीली तारें लगाई जा रही हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

अभेद्य सुरक्षा: इसकी ऊंचाई 12 फीट रखी गई है, जिससे इसे पार करना लगभग असंभव है।

एंटी-कट और एंटी-रस्ट: इस बाड़ को साधारण औजारों से काटना नामुमकिन है और विशेष धातुओं के प्रयोग के कारण इसमें जंग (Rust) भी नहीं लगता, जिससे यह लंबे समय तक प्रभावी रहेगी।

सघन बनावट: तारों का जाल इतना बारीक है कि इसमें से कोई भी संदिग्ध वस्तु आर-पार नहीं भेजी जा सकती।

किसानों को मिली राहत: जंगली जानवरों और गेट पास से आजादी

स्मार्ट फेंसिंग लगने से सीमावर्ती गांवों के किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

जमीन का समायोजन: फेंसिंग का एलाइनमेंट इस तरह किया गया है कि अधिकांश किसानों की जमीन अब तार के भीतर (भारतीय हिस्से में) आ गई है।

प्रशासनिक सुगमता: पहले फसल कटाई के समय किसानों को बड़ी संख्या में मजदूरों के लिए 'गेट पास' बनवाने पड़ते थे, जिसमें काफी समय बर्बाद होता था। अब जमीन अंदर आने से यह परेशानी कम हुई है।

जानवरों का डर खत्म: बाड़ की मजबूती के कारण पाकिस्तानी क्षेत्र से आने वाले जंगली जानवरों द्वारा फसल बर्बाद किए जाने की समस्या से भी किसानों को निजात मिली है।

मुआवजे को लेकर संघर्ष: किसानों की अनसुनी मांग

जहाँ एक ओर सुरक्षा पुख्ता हुई है, वहीं दूसरी ओर मुआवजे को लेकर किसानों में रोष भी है। बॉर्डर एरिया संघर्ष कमेटी के नेता और गांव रोसे के सरपंच प्रभशरण सिंह रोसे ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।

"स्मार्ट फेंसिंग और इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) के लिए किसानों की जमीन दो बार एक्वायर की गई है। केंद्र सरकार ने इसके लिए पैसा जारी कर दिया है, लेकिन पंजाब सरकार की ओर से अभी तक किसानों को मुआवजे का एक भी पैसा नहीं मिला है।" — प्रभशरण सिंह रोसे, सरपंच

किसानों का कहना है कि वे इस हक की लड़ाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं। उनकी मांग है कि केंद्र और राज्य सरकार समन्वय बनाकर जल्द से जल्द अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा प्रदान करें ताकि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सीमावर्ती किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।

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