टेलर की बेटी ने पेश की मिसाल; जबलपुर की अल्फिया अंजुम ने MP बोर्ड 12वीं में किया टॉप

जबलपुर की अल्फिया अंजुम ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से प्रदेश की मेरिट सूची में 10वां स्थान हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है। उनके पिता पेशे से एक टेलर हैं और मां गृहिणी। संसाधनों की कमी कभी उनकी राह का रोड़ा नहीं बनी।

16 Apr 2026  |  8

 

जबलपुर: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) द्वारा घोषित 12वीं के परीक्षा परिणामों ने कई संघर्षों और सफलताओं की कहानियों को जन्म दिया है। इन्हीं में से एक चमकता सितारा बनकर उभरी हैं जबलपुर की अल्फिया अंजुम। एक साधारण परिवार की इस बेटी ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से प्रदेश की मेरिट सूची में 10वां स्थान हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।

सीमित संसाधन, असीमित हौसला

अल्फिया की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता पेशे से एक टेलर हैं और मां गृहिणी। संसाधनों की कमी कभी उनकी राह का रोड़ा नहीं बनी।

स्कूल: अल्फिया जबलपुर के सरकारी स्कूल 'पंडित लज्जा शंकर झा' की छात्रा हैं।

स्कोर: उन्होंने 500 में से 480 अंक (96%) प्राप्त किए हैं।

अल्फिया के शब्द: "मुझे अच्छे परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन टॉप-10 में जगह बनाना मेरे लिए एक सुखद आश्चर्य है। यह पल मेरे परिवार के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।"

सफलता का मंत्र: नियमितता और डिजिटल अनुशासन

अल्फिया ने अपनी तैयारी को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा कीं, जो अन्य छात्रों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकती हैं:

नियमित पढ़ाई: वह सामान्य दिनों में 2 से 3 घंटे और परीक्षा के दौरान 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती थीं।

सोशल मीडिया का सही उपयोग: जहां आज के युवा सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करते हैं, वहीं अल्फिया ने इसका इस्तेमाल केवल शैक्षिक सामग्री और जानकारी जुटाने के लिए किया।

शिक्षक बनने का सपना: अल्फिया भविष्य में एक शिक्षिका बनना चाहती हैं। उनका कहना है कि वह उन मार्गदर्शकों की तरह बनना चाहती हैं जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया।

परिवार के लिए गौरव का क्षण

अल्फिया एक संयुक्त परिवार में रहती हैं, जहाँ उनके दादा-दादी और सभी सदस्यों का उन्हें भरपूर समर्थन मिला।

भावुक क्षण: अल्फिया की मां ने गर्व के साथ बताया, "आमतौर पर बच्चों की पहचान उनके पिता से होती है, लेकिन आज लोग मुझे 'अल्फिया की मां' के रूप में पहचान रहे हैं। यह मेरे जीवन का सबसे भावुक और गर्व महसूस कराने वाला क्षण है।"

अल्फिया के पिता ने दिन-रात मेहनत कर सिलाई के काम से घर चलाया, लेकिन अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। आज अल्फिया की इस कामयाबी ने उनके पिता के संघर्ष को एक सार्थक मुकाम दिया है।

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