विजय का 'विजयी' दांव: TVK के घोषणा पत्र में ₹2500 मासिक भत्ता, 6 मुफ्त सिलेंडर और पुरानी पेंशन का वादा

23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले, विजय ने लोकलुभावन वादों की झड़ी लगाते हुए महिलाओं, किसानों और सरकारी कर्मचारियों को साधने की बड़ी कोशिश की है। घोषणा पत्र में महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है।

16 Apr 2026  |  2

 

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख और दिग्गज अभिनेता विजय ने अपना चुनावी घोषणा पत्र (Manifesto) जारी कर दिया है। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले, विजय ने लोकलुभावन वादों की झड़ी लगाते हुए महिलाओं, किसानों और सरकारी कर्मचारियों को साधने की बड़ी कोशिश की है।

आधी आबादी के लिए 'बजट' वाली घोषणाएं

घोषणा पत्र में महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है। विजय ने वादा किया है कि:

मासिक सहायता: 60 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को हर महीने ₹2500 की आर्थिक मदद दी जाएगी।

रसोई को राहत: महंगाई के दौर में हर परिवार को साल में 6 मुफ्त एलपीजी गैस सिलेंडर प्रदान किए जाएंगे।

विवाह सहायता: गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और उच्च गुणवत्ता वाली सिल्क साड़ी उपहार स्वरूप दी जाएगी।

सरकारी कर्मचारी और युवा: पुरानी पेंशन की वापसी का भरोसा

कर्मचारी वर्ग के लिए विजय ने एक बड़ा कार्ड खेला है। उन्होंने वादा किया है कि सत्ता में आने पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसके साथ ही:

संविदा (Contract) पर काम कर रहे कर्मचारियों और नर्सों की सेवाओं को नियमित किया जाएगा।

राज्य में 'पट्टा नियमितीकरण' की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।

हर घर तक 100% पाइप के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुँचाने का संकल्प लिया गया है।

किसानों की कर्जमाफी और शिक्षा पर जोर

कृषि क्षेत्र को राहत देते हुए टीवीके प्रमुख ने घोषणा की है कि 5 एकड़ से कम जमीन वाले छोटे किसानों के सभी कृषि सहकारी फसल ऋण पूरी तरह माफ किए जाएंगे। शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े सुधारों और बेहतर बुनियादी ढांचे का वादा किया गया है।

चुनाव विश्लेषकों की राय

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय ने अपने पहले बड़े चुनावी समर के लिए "कल्याणकारी राजनीति" (Welfare Politics) का रास्ता चुना है। ₹2500 का मासिक भत्ता और ऋण माफी जैसे कदम सीधे तौर पर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसके हाथ होगी, इसका फैसला तो चुनाव के बाद होगा, लेकिन विजय के इन "सुपरहिट" वादों ने राज्य के सियासी समीकरणों को जरूर गरमा दिया है।

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