संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले 'अस्वीकार्य', तनाव कम करने की पुरजोर अपील

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित नौवहन की तत्काल बहाली और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने की जोरदार अपील की।

17 Apr 2026  |  5

 

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: मध्य पूर्व में गहराते संकट के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित नौवहन की तत्काल बहाली और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने की जोरदार अपील की।

समुद्री सुरक्षा: भारत के आर्थिक हितों की जीवनरेखा

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पी ने वीटो पहल के तहत आयोजित बहस को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा भारत के ऊर्जा और आर्थिक हितों के लिए अपरिहार्य है। उन्होंने कहा:

"स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली वाणिज्यिक आवाजाही में रुकावट भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। नागरिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानकों का खुला उल्लंघन है और यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।"

नागरिकों की सुरक्षा पर सर्वोच्च प्राथमिकता

भारत ने इस संघर्ष के मानवीय पक्ष पर जोर देते हुए कहा कि इस टकराव के दौरान भारतीय नाविकों की जान गई है, जो अत्यंत दुखद है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और व्यापारिक आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का कड़ाई से पालन हो।

कूटनीति और संवाद ही एकमात्र समाधान

भारत ने इस संकट के समाधान के लिए 'संयम, संवाद और कूटनीति' का मंत्र दिया। हरिश पी ने उल्लेख किया कि:

28 फरवरी 2026 को संघर्ष शुरू होने के बाद से ही भारत लगातार संयम बरतने की अपील कर रहा है।

तनाव को कम करना और नागरिकों की रक्षा करना सभी पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

किसी भी स्थायी समाधान के लिए सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है।

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ता खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। भारत का मानना है कि इस मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार को अस्थिर कर सकता है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को रोका जा सके।

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