नेपाल में भ्रष्टाचार पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': गठित किया ऐतिहासिक न्यायिक आयोग, पूर्व राजा से लेकर वर्तमान मंत्रियों तक की होगी जांच

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2006 (राजतंत्र की समाप्ति) से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे दिग्गजों की संपत्ति की जांच के लिए पाँच सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है।

17 Apr 2026  |  5

 

काठमांडू: नेपाल की नवनिर्वाचित सरकार ने देश के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास में अब तक का सबसे साहसिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2006 (राजतंत्र की समाप्ति) से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे दिग्गजों की संपत्ति की जांच के लिए पाँच सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है।

जांच के घेरे में 'पावरफुल' चेहरे

यह आयोग पिछले दो दशकों के दौरान सत्ता के गलियारों में रहे लगभग हर प्रभावशाली व्यक्ति की संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा खंगालेगा। जांच के दायरे में शामिल प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

पूर्व राजपरिवार: पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह।

राष्ट्रपति: तीन पूर्व राष्ट्रपति (राम बरन यादव, विद्या देवी भंडारी) और वर्तमान राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल।

पूर्व प्रधानमंत्री: गिरिजा प्रसाद कोइराला, पुष्प कमल दहल 'प्रचंड', केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा, माधव कुमार नेपाल और बाबूराम भट्टराई सहित सभी पूर्व पीएम।

अंतरिम प्रमुख: पूर्व अंतरिम प्रधानमंत्री खिलराज रेग्मी और सुशीला कार्की।

अपनों को भी नहीं बख्शा: आरएसपी का कड़ा रुख

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में कोई भी 'पवित्र गाय' नहीं है। जांच के दायरे में वर्तमान स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल और खुद आरएसपी के अध्यक्ष रवि लामिछाने जैसे सरकार के अपने करीबी सहयोगी भी आ सकते हैं। इतना ही नहीं, जांच मृत नेताओं (जैसे सुशील कोइराला) के उत्तराधिकारियों तक भी विस्तारित होगी।

युवा आंदोलन की उपज है यह आयोग

यह ऐतिहासिक निर्णय मार्च 2025 के चुनावों में आरएसपी की भारी जीत और पिछले साल हुए देशव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी युवा आंदोलन का परिणाम है।

"यह न्यायिक पैनल केवल कानून और सबूतों के आधार पर काम करेगा। निष्पक्ष जांच के बाद आयोग की जो भी सिफारिशें होंगी, उन्हें सरकारी एजेंसियां सख्ती से लागू करेंगी।" — सस्मित पोखरेल, कैबिनेट प्रवक्ता

आयोग की कमान और मिशन

इस उच्चस्तरीय आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज राजेंद्र कुमार भंडारी कर रहे हैं। आयोग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह संवैधानिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों की संपत्तियों की वैधता की जांच करे।

निष्कर्ष: नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना के बाद यह पहला अवसर है जब राजनीतिक और प्रशासनिक वर्ग की इतनी व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है। इसे नेपाल के सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक 'टर्निंग पॉइंट' माना जा रहा है।

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