दो मोर्चों पर घिरे अमेरिका का रक्षा संकट: मिडिल ईस्ट में खर्च हुई मिसाइलें, यूक्रेन के आसमान में बढ़ा रूस का खतरा

ईरान-इजराइल युद्ध में अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के भारी इस्तेमाल के कारण यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य मदद पर 'ब्रेक' लग गया है। इसका सीधा फायदा उठाते हुए रूस ने यूक्रेन पर इस साल का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है, जिसे रोकने में यूक्रेनी रक्षा तंत्र विफल रहा।

17 Apr 2026  |  18

 

वॉशिंगटन/कीव: वैश्विक राजनीति में एक अभूतपूर्व मोड़ आया है, जहाँ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष ने यूरोप के युद्ध मैदान को कमजोर कर दिया है। ईरान-इजराइल युद्ध में अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के भारी इस्तेमाल के कारण यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य मदद पर 'ब्रेक' लग गया है। इसका सीधा फायदा उठाते हुए रूस ने यूक्रेन पर इस साल का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है, जिसे रोकने में यूक्रेनी रक्षा तंत्र विफल रहा।

'ईरान युद्ध' बना यूक्रेन की कमजोरी की वजह

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी-मार्च 2026 में ईरान द्वारा दागे गए सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के लिए Patriot और THAAD सिस्टमों का रिकॉर्ड इस्तेमाल हुआ।

चौंकाने वाले आंकड़े: मिडिल ईस्ट के सहयोगियों ने मात्र एक हफ्ते में 800 Patriot इंटरसेप्टर फायर कर दिए। तुलनात्मक रूप से देखें तो यूक्रेन ने पिछले चार वर्षों के युद्ध में कुल 600 इंटरसेप्टर ही इस्तेमाल किए थे।

स्टॉक में गिरावट: इस युद्ध ने अमेरिका के पास मौजूद Patriot इंटरसेप्टर के जरूरी स्टॉक को घटाकर मात्र 25% पर ला दिया है।

उत्पादन और मांग के बीच गहराती खाई

अमेरिकी रक्षा उद्योग (Lockheed Martin) की उत्पादन क्षमता वर्तमान मांग के मुकाबले बेहद कम है:

Patriot PAC-3: साल भर में केवल 500-650 मिसाइलों का उत्पादन हो पा रहा है।

THAAD: इसकी उत्पादन दर मात्र 96 प्रति वर्ष है, जबकि ईरान युद्ध में अमेरिका ने अपने कुल स्टॉक का करीब 25-30% हिस्सा पहले ही खर्च कर दिया है।

समाधान में देरी: पेंटागन ने उत्पादन को 2000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसे धरातल पर आने में 7 साल लगेंगे।

यूक्रेन पर रूसी कहर: रक्षा कवच में दरार

पेंटागन द्वारा मिसाइलों की खेप को डायवर्ट करने के फैसले के बाद रूस ने यूक्रेन के Zaporizhzhia, खार्किव और ओडेसा जैसे शहरों पर हमले तेज कर दिए हैं।

जेलेंस्की की चेतावनी: यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आगाह किया है कि अगर ईरान युद्ध लंबा चला, तो यूक्रेन का आसमान रूसी मिसाइलों के लिए पूरी तरह खुला रह जाएगा।

ट्रंप का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कमी के लिए पुरानी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि स्टॉक की कमी पिछली सरकार की गलतियों का नतीजा है।

एक युद्ध, दूसरे की बलि: आर्थिक और सामरिक विडंबना

आर्थिक बोझ: एक PAC-3 इंटरसेप्टर की कीमत लगभग 13 मिलियन डॉलर है। ईरान में अरबों डॉलर के इंटरसेप्टर चंद दिनों में हवा में उड़ा दिए गए।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा: केवल यूक्रेन ही नहीं, बल्कि ताइवान और नाटो (NATO) देश भी इसी घटते स्टॉक पर निर्भर हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा संतुलन बिगड़ रहा है।

रूसी रणनीति: रूस अब उन यूक्रेनी शहरों को निशाना बना रहा है जहाँ Patriot सिस्टम की संख्या कम हो गई है।

भविष्य की राह: क्या दो मोर्चों पर लड़ना मुश्किल है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका वर्तमान में "मिसाइल गैप" (मिसाइलों की कमी) के दौर से गुजर रहा है। हालांकि अमेरिका ने उत्पादन बढ़ाने के समझौते किए हैं, लेकिन वे तत्काल राहत देने में अक्षम हैं। यूक्रेन ने अब खुद के ड्रोन और इंटरसेप्टर सह-उत्पादन का प्रस्ताव दिया है ताकि अमेरिकी निर्भरता कम की जा सके।

निष्कर्ष: क्या अमेरिका दो मोर्चों की जंग एक साथ लड़ने की क्षमता खो चुका है? यह सवाल अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है, क्योंकि ईरान में दागी गई हर एक अमेरिकी मिसाइल यूक्रेन की रक्षा दीवार को और कमजोर कर रही है।

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