सोने-चांदी के आयात पर 'ब्रेक': कस्टम पर फंसा टन भर माल, जानें क्यों सरकार ने चली है यह बड़ी आर्थिक चाल?

विदेशों से आने वाला सोना और चांदी देश के बंदरगाहों पर तो पहुंच गया है, लेकिन वहां से आगे नहीं बढ़ पा रहा। बैंकों ने नया ऑर्डर देना बंद कर दिया है और कस्टम विभाग माल को मंजूरी नहीं दे रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो यह केवल एक प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि रुपये को बचाने के लिए सरकार की एक सोची-समझी 'आर्थिक घेराबंदी' हो सकती है।

17 Apr 2026  |  3

 

नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार इस समय एक अभूतपूर्व संकट की स्थिति से गुजर रहा है। विदेशों से आने वाला सोना और चांदी देश के बंदरगाहों पर तो पहुंच गया है, लेकिन वहां से आगे नहीं बढ़ पा रहा। बैंकों ने नया ऑर्डर देना बंद कर दिया है और कस्टम विभाग माल को मंजूरी नहीं दे रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो यह केवल एक प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि रुपये को बचाने के लिए सरकार की एक सोची-समझी 'आर्थिक घेराबंदी' हो सकती है।

बंदरगाहों पर फंसी है भारी खेप

वर्तमान में मुंबई और अन्य प्रमुख बंदरगाहों पर लगभग 5 टन सोना और 8 टन चांदी कस्टम क्लीयरेंस के इंतजार में अटका हुआ है। इसकी मुख्य वजह नियमों की पेचीदगी है:

आदेश में देरी: कौन से बैंक सोना मंगा सकते हैं, इसकी सूची विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) हर साल जारी करता है।

समय सीमा समाप्त: पिछले साल का आदेश 31 मार्च को खत्म हो चुका है, लेकिन अप्रैल के मध्य तक सरकार ने नया नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। बिना वैध आदेश के कस्टम विभाग माल को रिलीज करने को तैयार नहीं है।

ईरान विवाद और रुपये का गणित: क्यों लगा है 'ब्रेक'?

बाजार के जानकारों का विश्लेषण है कि सरकार ने जानबूझकर इस फाइल को रोक रखा है। इसके पीछे तीन बड़े कारण नजर आते हैं:

कच्चे तेल का दबाव: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। भारत को तेल आयात के लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं।

रुपये को सहारा: डॉलर की मांग बढ़ने से भारतीय रुपया कमजोर हो रहा है। सोने का आयात कम करके सरकार विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) को बचाना चाहती है ताकि रुपये की गिरावट को थामा जा सके।

व्यापार घाटा (Trade Deficit): अप्रैल महीने में बढ़ते इंपोर्ट बिल को संतुलित करने के लिए सरकार गैर-जरूरी या लग्जरी आयात (जैसे सोना) को धीमा करने की रणनीति अपना रही है।

अक्षय तृतीया पर बढ़ सकती है आपकी जेब पर मार

इस आयात संकट का सीधा असर आम ग्राहकों और ज्वैलर्स पर पड़ने वाला है:

प्रीमियम का बोझ: बाजार में नए माल की किल्लत होने पर ज्वैलर्स तय रेट से ज्यादा यानी 'प्रीमियम' वसूल सकते हैं।

त्योहारी सीजन में कमी: सामने अक्षय तृतीया जैसे बड़े त्योहार हैं। यदि सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो बाजार में गहनों की भारी कमी और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।

स्टॉक पर निर्भरता: फिलहाल बाजार पुराने स्टॉक और गोल्ड ईटीएफ के भरोसे चल रहा है, लेकिन यह लंबे समय तक मांग पूरी करने के लिए नाकाफी है।

विशेषज्ञों की राय: "सरकार इस समय दोतरफा जंग लड़ रही है—एक तरफ तेल की बढ़ती कीमतें और दूसरी तरफ कमजोर होता रुपया। ऐसे में सोने के आयात को नियंत्रित करना एक अस्थाई 'स्पीड ब्रेकर' की तरह है, लेकिन इसका खामियाजा खुदरा निवेशकों को ऊँची कीमतों के रूप में चुकाना पड़ सकता है।"

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