AI से डरी 'जेन-जी': भविष्य के करियर और नौकरियों को लेकर बढ़ी बेचैनी, नई रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

आमतौर पर नई तकनीकों को सबसे पहले अपनाने वाली Gen Z (जेन-जी) के बीच AI को लेकर उत्साह कम और डर ज्यादा नजर आ रहा है। एक नई स्टडी के अनुसार, युवाओं को डर है कि AI न केवल उनकी नौकरियां छीन लेगा, बल्कि उनके सीखने की क्षमता को भी पंगु बना देगा।

17 Apr 2026  |  18

 

वाशिंगटन/न्यूयॉर्क: जिसे हम डिजिटल युग की सबसे स्मार्ट पीढ़ी मानते हैं, वही अब भविष्य की सबसे बड़ी तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर सशंकित है। आमतौर पर नई तकनीकों को सबसे पहले अपनाने वाली Gen Z (जेन-जी) के बीच AI को लेकर उत्साह कम और डर ज्यादा नजर आ रहा है। एक नई स्टडी के अनुसार, युवाओं को डर है कि AI न केवल उनकी नौकरियां छीन लेगा, बल्कि उनके सीखने की क्षमता को भी पंगु बना देगा।

उत्साह की जगह ले रहा है गुस्सा और डर

'Gallup', 'GSV Ventures' और 'Walton Family Foundation' द्वारा किए गए एक व्यापक सर्वे में युवाओं के बदलते मिजाज की झलक मिलती है:

भरोसे में भारी गिरावट: पिछले एक साल में AI को लेकर युवाओं के उत्साह में 14 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।

बढ़ता गुस्सा: इस तकनीक को लेकर गुस्से की भावना 22% से बढ़कर 31% तक पहुंच गई है।

नुकसान की आशंका: लगभग 48 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि कार्यस्थल (Workplace) पर AI फायदों के बजाय नुकसान अधिक पहुँचाएगा।

करियर और स्किल डेवलपमेंट पर मंडराता खतरा

युवा केवल नौकरी खोने से ही नहीं डरे हुए हैं, बल्कि उन्हें अपने मौलिक कौशल (Core Skills) के खत्म होने का भी डर है। रिपोर्ट की कुछ मुख्य चिंताएं इस प्रकार हैं:

सीखने में 'शॉर्टकट' का डर: सर्वे में शामिल 80 प्रतिशत लोगों का मानना है कि AI पर निर्भरता सीखने की प्रक्रिया को अंततः और कठिन बना देती है। उन्हें डर है कि यह 'शॉर्टकट' उनकी क्रिटिकल थिंकिंग और क्रिएटिविटी को कमजोर कर देगा।

क्षमताओं पर संदेह: जेन-जी को अब भी यकीन नहीं है कि AI वास्तव में उनकी रचनात्मकता या कार्यकुशलता (Efficiency) में कोई वास्तविक सुधार ला सकता है।

करियर की अनिश्चितता: तकनीक के जिस तेजी से बदलते स्वरूप को वे देख रहे हैं, उससे उन्हें अपने लॉन्ग-टर्म करियर गोल्स धुंधले नजर आ रहे हैं।

दोराहे पर खड़ी अगली पीढ़ी

दिलचस्प बात यह है कि अपनी तमाम आशंकाओं के बावजूद, युवा यह जानते हैं कि वे AI से पूरी तरह पीछा नहीं छुड़ा सकते।

अधिकांश छात्रों का मानना है कि उच्च शिक्षा और करियर के लिए उन्हें AI स्किल्स सीखने की जरूरत होगी।

वे खुद को इस तकनीक के अनुसार ढालने के लिए तैयार तो हैं, लेकिन एक 'डर' के साये में।

निष्कर्ष: भरोसा जीतना होगी बड़ी चुनौती

यह रिपोर्ट टेक कंपनियों, नीति निर्माताओं और शिक्षकों के लिए एक चेतावनी की तरह है। अब तक यह माना जाता था कि नई तकनीक को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाना आसान है, लेकिन AI के मामले में यह धारणा गलत साबित हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है: "अगली पीढ़ी का भरोसा जीतने के लिए सिर्फ तकनीक देना काफी नहीं है। अब यह साबित करना होगा कि AI इंसानी दिमाग की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उसे सशक्त बनाने के लिए है।"

साफ है कि भविष्य की इस दौड़ में जेन-जी फिलहाल 'सावधानी' का बटन दबाकर खड़ी है। वे AI को एक मददगार उपकरण के रूप में देखना चाहते हैं, न कि एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी के रूप में जो उनकी पहचान और आजीविका छीन ले।

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