महिला आरक्षण पर अमित शाह का विपक्ष को करारा जवाब: "2029 का चुनाव नारी शक्ति के साथ होगा, परिसीमन का विरोध SC-ST विरोधी"

नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और संबंधित विधेयकों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न होगा और इसमें किसी भी राज्य, विशेषकर दक्षिण भारत के हितों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

17 Apr 2026  |  26

 

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण, परिसीमन (Delimitation) और जाति जनगणना जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और संबंधित विधेयकों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने स्पष्ट किया कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न होगा और इसमें किसी भी राज्य, विशेषकर दक्षिण भारत के हितों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

"विरोध क्रियान्वयन का नहीं, मंशा का है"

विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष 'किंतु-परंतु' का सहारा लेकर महिला आरक्षण की राह में रोड़े अटका रहा है।

"बहस में 56 महिला सांसदों ने हिस्सा लिया। विपक्ष कह रहा है कि वे क्रियान्वयन का विरोध कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह विरोध महिला आरक्षण के प्रति उनकी दुर्भावना को दर्शाता है। मातृ शक्ति चुनाव में इसका हिसाब मांगेगी।"

परिसीमन और SC-ST सीटों का गणित

अमित शाह ने तर्क दिया कि जो लोग परिसीमन विधेयक, 2026 का विरोध कर रहे हैं, वे दरअसल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटों में होने वाली बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।

एक वोट, एक मूल्य: शाह ने कहा कि देश में 127 सीटें ऐसी हैं जहां 20 लाख से अधिक मतदाता हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह संख्या बहुत कम है। यह 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के लोकतांत्रिक सिद्धांत के खिलाफ है।

जनसंख्या का दबाव: 1976 में देश की आबादी 56.7 करोड़ थी जो अब 140 करोड़ पार कर चुकी है। ऐसे में सांसदों की संख्या बढ़ाना अनिवार्य है।

ओबीसी (OBC) और जाति जनगणना पर बड़ा ऐलान

गृह मंत्री ने विपक्ष के जाति जनगणना टालने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

जाति जनगणना 2026: मोदी कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि 2026 की जनगणना जातिगत आंकड़ों के साथ होगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

OBC विरोधी कांग्रेस: शाह ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 1951 और 1971 में कांग्रेस ने ही जाति जनगणना का विरोध किया था। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार में 27 मंत्री (40%) ओबीसी समुदाय से हैं। हमने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया, जबकि कांग्रेस ने कभी किसी अति-पिछड़ा को प्रधानमंत्री नहीं बनाया।"

दक्षिण भारत की सीटों पर स्पष्टीकरण

उत्तर बनाम दक्षिण के नैरेटिव को खारिज करते हुए शाह ने आंकड़ों के जरिए आश्वस्त किया कि दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा:

वर्तमान स्थिति: कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल की कुल 129 सीटें (23.76%) हैं।

भविष्य का खाका: परिसीमन के बाद जब कुल सीटें 816 होंगी, तब इन राज्यों की सीटें बढ़कर 195 हो जाएंगी, जो कुल सदन का 23.87% हिस्सा होगा। यानी उनके प्रतिनिधित्व प्रतिशत में कोई कमी नहीं आएगी।

धर्म आधारित आरक्षण पर 'नो'

तुष्टिकरण की राजनीति पर प्रहार करते हुए शाह ने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण स्वीकार नहीं करता।

"भाजपा की नीति स्पष्ट है—हम न धर्म के आधार पर आरक्षण देंगे और न ही किसी को देने देंगे। आरक्षण जन्म से मिलने वाला संवैधानिक अधिकार है, इसे किसी अन्य आधार पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।"

निष्कर्ष: सरकार के इन प्रस्तावित बदलावों से विधायी संस्थाओं में महिलाओं की 33% भागीदारी और वंचित वर्गों के उचित प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त होगा। सदन में इन बिलों पर वोटिंग आज ही होने की संभावना है।

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