वॉशिंगटन: वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल की कीमतों और ऊर्जा संकट के दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने एक यू-टर्न लेते हुए रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर प्रतिबंधों से छूट फिर से बहाल कर दी है। ट्रेजरी विभाग द्वारा शुक्रवार देर रात जारी यह नया लाइसेंस लगभग एक महीने के लिए वैध होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
नीति में अचानक बदलाव: 48 घंटे के भीतर फैसला पलटा
दिलचस्प बात यह है कि यह निर्णय ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के उस बयान के ठीक दो दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन रूसी तेल के लिए दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। हालांकि, शुक्रवार रात ट्रेजरी विभाग ने अपनी वेबसाइट पर नया लाइसेंस जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी।
लाइसेंस की मुख्य शर्तें:
समय सीमा: यह छूट 16 मई तक प्रभावी रहेगी।
पात्रता: केवल उन रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति होगी, जिन्हें शुक्रवार तक जहाजों पर लाद दिया गया था।
दायरा: इस लाइसेंस के दायरे से ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े लेन-देन को पूरी तरह बाहर रखा गया है।
ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास
ट्रंप प्रशासन का यह कदम मुख्य रूप से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के लिए उठाया गया है। ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया था।
ट्रेजरी विभाग का मानना है कि इस छूट से बाजार में रूसी कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और आपूर्ति पर पड़ा दबाव कम होगा।
रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव के अनुसार, इस पहली छूट से बाजार में लगभग 10 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल उपलब्ध होगा, जो दुनिया के एक दिन के कुल उत्पादन के बराबर है।
भारत का स्टैंड: अपनी शर्तों पर जारी रहेगी खरीद
अमेरिकी प्रतिबंधों और छूट के इस खेल के बीच भारत ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। भारत सरकार ने साफ किया है कि वह इन अस्थायी लाइसेंसों या फैसलों से प्रभावित नहीं होगा। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चा तेल और LPG की खरीद पहले की तरह जारी रखेगा।
बाजार पर प्रभाव: अस्थायी राहत या सिर्फ दिखावा?
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि इस राहत से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह अभी भी अनिश्चित है कि क्या यह पेट्रोलियम की कीमतों में जारी उछाल को पूरी तरह रोकने में सक्षम होगा। विशेषकर तब, जब ईरान के तेल पर मिलने वाली छूट की समय सीमा समाप्त होने वाली है।
"ईरानी छूट की वजह से लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच पाया था, जिसने युद्ध के दौरान आपूर्ति के दबाव को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई।" — स्कॉट बेसेंट, ट्रेजरी सेक्रेटरी