नई दिल्ली: यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशों के बीच यूक्रेन के नेशनल सिक्योरिटी और डिफेंस काउंसिल के सेक्रेटरी रुस्तम उमेरोव ने भारत का महत्वपूर्ण दौरा किया। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बेहद करीबी माने जाने वाले उमेरोव ने गुरुवार (17 अप्रैल) को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कीं।
'स्थायी शांति' पर गहन मंथन
इन बैठकों का मुख्य केंद्र यूक्रेन में 'स्थायी और टिकाऊ शांति' लाने की संभावनाओं को तलाशना था। उमेरोव ने भारतीय नेतृत्व को युद्ध के 'फ्रंटलाइन' की मौजूदा स्थिति और सीमा पर हो रहे घटनाक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।
द्विपक्षीय सहयोग: चर्चा के दौरान अगस्त 2024 में कीव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच हुए समझौतों को लागू करने पर जोर दिया गया।
भारत का रुख: भारतीय पक्ष ने एक बार फिर अपना सैद्धांतिक रुख दोहराया कि किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy) के जरिए ही संभव है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ चर्चा
बैठक के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग और यूक्रेन संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। उमेरोव ने इस बातचीत को "खुली और सार्थक" बताते हुए कहा:
"हमने सीमा पर मौजूदा स्थिति और यूक्रेन के लिए एक न्यायपूर्ण शांति हासिल करने की संभावनाओं पर चर्चा की। मैं इस संवाद के लिए आभारी हूं और हम द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद करते हैं।"
NSA अजित डोभाल के साथ सुरक्षा समीक्षा
NSA अजित डोभाल के साथ हुई बैठक में सुरक्षा स्थिति का व्यापक आकलन किया गया। उमेरोव ने भारत के सुरक्षा तंत्र के साथ युद्ध के रणनीतिक पहलुओं को साझा किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि एनएसए ने शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर भारत के अडिग रुख को फिर से स्पष्ट किया है।
महत्वपूर्ण बिंदु: बैठक के मुख्य निष्कर्ष
रणनीतिक संवाद: जेलेंस्की के दूत के रूप में उमेरोव की यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक मध्यस्थता की भूमिका को दर्शाती है।
संयुक्त बयान पर अमल: दोनों देश अगस्त 2024 के संयुक्त विजन को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं।
शांति की अपील: भारत ने लगातार संघर्ष-विराम और कूटनीतिक रास्तों को अपनाने का आह्वान किया है।
निष्कर्ष: रुस्तम उमेरोव की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक समुदाय भारत से रूस-यूक्रेन संघर्ष में एक सक्रिय शांतिदूत की भूमिका निभाने की उम्मीद कर रहा है। भारत का संतुलित दृष्टिकोण और दोनों पक्षों से संवाद की क्षमता इस संकट के समाधान में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।