कश्मीर में भूकंप के झटके: अफगानिस्तान का बदाखशान था केंद्र, विशेषज्ञों ने कंक्रीट की इमारतों को लेकर चेताया

कश्मीर घाटी एक बार फिर भूकंप के झटकों से दहल उठी। रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का बदाखशान प्रांत रहा।

18 Apr 2026  |  15

 

श्रीनगर: शनिवार (18 अप्रैल, 2026) की सुबह कश्मीर घाटी एक बार फिर भूकंप के झटकों से दहल उठी। रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का बदाखशान प्रांत रहा। हालांकि, अभी तक जान-माल के किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन इस घटना ने घाटी में भूकंपीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

भूकंप के तकनीकी विवरण

आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, भूकंप सुबह 8:24 बजे आया।

तीव्रता: 5.3 (रिक्टर स्केल)

केंद्र: बदाखशान, अफगानिस्तान (गहराई: 190 किमी)

स्थिति: 36.55° उत्तरी अक्षांश और 70.92° पूर्वी देशांतर

विनाशकारी इतिहास की यादें

कश्मीर घाटी एक उच्च-भूकंपीय क्षेत्र (High-Seismic Zone) में स्थित है। शनिवार के झटकों ने लोगों को 8 अक्टूबर, 2005 के उस खौफनाक मंजर की याद दिला दी, जब 7.6 तीव्रता के भूकंप ने मुजफ्फराबाद और उरी जैसे शहरों को मलबे के ढेर में बदल दिया था। उस त्रासदी में 80,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

इतिहास के पन्नों से कुछ बड़े भूकंप:

1555: 7.6 तीव्रता (अनुमानित), जिसने वेशा नदी का रास्ता तक बदल दिया था।

1885: 6.8 तीव्रता, जिसमें श्रीनगर और बारामूला में 3,000 से अधिक मौतें हुईं।

1828: पांड्रेथन मंदिर के ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार एक अत्यंत शक्तिशाली भूकंप।

विशेषज्ञों की चेतावनी: 'कंक्रीट की इमारतें बन सकती हैं कब्रगाह'

भूकंप विशेषज्ञों और स्ट्रक्चरल इंजीनियरों ने घाटी में तेजी से बढ़ते सीमेंट-कंक्रीट के निर्माण पर गहरी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का तर्क है कि:

कंक्रीट की इमारतों में भूकंप के झटकों को सहने की क्षमता (Flexibility) बहुत कम होती है।

अधिक संवेदनशील होने के कारण ये इमारतें झटके लगते ही ढह जाती हैं।

विशेषज्ञों ने पारंपरिक निर्माण शैलियों और भूकंप-रोधी (Earthquake-resistant) तकनीकों को अपनाने की वकालत की है।

निष्कर्ष: घाटी की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह अनिवार्य है कि भविष्य में होने वाले निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि किसी भी बड़ी आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

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