नई दिल्ली/चंडीगढ़: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल रहे गेहूं उत्पादक किसानों के लिए केंद्र सरकार ने राहत का बड़ा पिटारा खोला है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए गेहूं खरीद के कड़े मानकों (Quality Norms) में विशेष ढील देने के आदेश जारी किए हैं।
मानकों में बड़ी रियायत: अब मंडियों में नहीं अटकेगी फसल
मंत्रालय के नए निर्देशों के अनुसार, बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता में आई कमी को स्वीकार करते हुए दो प्रमुख मानकों में बदलाव किया गया है:
लस्टर लॉस (चमक में कमी): गेहूं की चमक कम होने की सीमा को बढ़ाकर अब 70% तक कर दिया गया है।
सिकुड़े और टूटे दाने (Shrivelled and Broken Grains): इसकी सीमा को बढ़ाकर 15% तक कर दिया गया है।
यह फैसला भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के प्रस्तावों के बाद लिया गया है, ताकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य (MSP) मिल सके और उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों पर न बेचनी पड़े।
शर्तों के साथ मिली है छूट
केंद्र सरकार ने रियायत तो दी है, लेकिन इसके साथ ही भंडारण और गुणवत्ता को लेकर कुछ सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं:
अलग भंडारण: ढीले मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के स्टॉक को 'अलग' रखा जाएगा और उसका रिकॉर्ड भी अलग से तैयार होगा।
राज्य की जिम्मेदारी: भंडारण (Storage) के दौरान यदि गुणवत्ता और अधिक खराब होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
प्राथमिकता पर निपटान: इस श्रेणी के गेहूं के स्टॉक को सबसे पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) या अन्य योजनाओं के तहत निपटाने का निर्देश दिया गया है ताकि लंबे समय तक रखने से यह खराब न हो।
वित्तीय भार: इस प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी अतिरिक्त वित्तीय या संचालन संबंधी जिम्मेदारी का वहन राज्य सरकार को ही करना होगा।
विशेषज्ञों की राय: किसानों के लिए संजीवनी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह छूट नहीं मिलती, तो पंजाब और चंडीगढ़ की मंडियों में बड़ी मात्रा में गेहूं सरकारी खरीद से बाहर हो सकता था। इस कदम से:
मंडियों में खरीद की प्रक्रिया सुचारु होगी।
किसानों को आर्थिक नुकसान से सुरक्षा मिलेगी।
बेमौसम बारिश से प्रभावित हुई फसल का भी उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।
अधिकारियों का रुख: पंजाब सरकार और एफसीआई ने नई गाइडलाइन के तहत खरीद की तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से मंडियों में गेहूं की आवक और उठाव में तेजी आएगी, जिससे किसानों को समय पर भुगतान मिल सकेगा।