केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार का तोहफा: महंगाई भत्ते में 2% की वृद्धि, 8वें वेतन आयोग पर भी बढ़ी हलचल

केंद्र सरकार ने कैबिनेट के ताजा फैसले के अनुसार, महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यह संशोधन 1 जनवरी से प्रभावी माना जाएगा, जिससे बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की 'टेक-होम पे' (Take-home Pay) में इजाफा होगा।

18 Apr 2026  |  4

 

नई दिल्ली | समाचार ब्यूरो केंद्र सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही अपने लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। कैबिनेट के ताजा फैसले के अनुसार, महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यह संशोधन 1 जनवरी से प्रभावी माना जाएगा, जिससे बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की 'टेक-होम पे' (Take-home Pay) में इजाफा होगा।

वेतन संरचना में बदलाव और प्रभावी दरें

इस बढ़ोतरी के साथ ही अब महंगाई भत्ते का गणित बदल गया है। पिछली दर मूल वेतन का 58% थी, जो अब बढ़कर 60% हो जाएगी। हालांकि यह वृद्धि संख्या में मामूली लग सकती है, लेकिन लाखों परिवारों की मासिक आय और क्रय शक्ति पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

8वें वेतन आयोग को लेकर सुगबुगाहट तेज

डीए में वृद्धि के साथ-साथ अब गलियारों में 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में भविष्य की वेतन संरचना को लेकर क्रांतिकारी बदलावों की मांग की गई है।

प्रमुख मांगें एक नजर में:

न्यूनतम वेतन: मौजूदा ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 करने का प्रस्ताव।

फिटमेंट फैक्टर: इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग।

वार्षिक वृद्धि: वेतन में सालाना 6% की बढ़ोतरी का सुझाव।

HRA: न्यूनतम हाउस रेंट अलाउंस को 30% तक ले जाने की मांग।

पुरानी पेंशन (OPS): पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग पर भी जोर दिया गया है।

"महंगाई के मौजूदा दौर में यह 2% की वृद्धि एक तात्कालिक मरहम की तरह है, लेकिन हमारी मुख्य नजर 8वें वेतन आयोग के गठन और वेतन के व्यापक पुनरीक्षण पर टिकी है।" — कर्मचारी संघ प्रतिनिधि

निष्कर्ष

सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई दर आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है। जहाँ एक ओर डीए में वृद्धि से तात्कालिक राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग की मांगों ने सरकार के सामने एक नई वित्तीय चुनौती पेश कर दी है। अब देखना यह है कि क्या सरकार न्यूनतम वेतन में इतने बड़े उछाल की मांग को स्वीकार करती है या नहीं।

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