"सत्ता सदा के लिए नहीं रहती": ममता बनर्जी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, परिसीमन बिल को बताया 'भारत तोड़ने' की साजिश

रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विधेयक को भारत को 'टुकड़ों-टुकड़ों' में बांटने की कोशिश करार दिया और कहा कि न्याय की घंटी हवा के झोंके से भी हिल सकती है।

18 Apr 2026  |  9

 

कूचबिहार/कोलकाता | समाचार ब्यूरो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा में केंद्र सरकार के 'परिसीमन विधेयक' (Delimitation Bill) के गिरने से ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। कूचबिहार की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने इस विधेयक को भारत को 'टुकड़ों-टुकड़ों' में बांटने की कोशिश करार दिया और कहा कि न्याय की घंटी हवा के झोंके से भी हिल सकती है।

लोकसभा में बिल का गिरना: भाजपा के मंसूबों पर फिरा पानी

संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) न जुटा पाने के कारण यह विधेयक सदन में गिर गया। भाजपा को केवल 298 वोट मिले, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। ममता बनर्जी ने पहले ही इस प्रक्रिया को 'अवैध' बताते हुए आगाह किया था कि बिना पूर्ण बहुमत के संविधान में ऐसा बदलाव मुमकिन नहीं है।

"भारत को 850 टुकड़ों में बांटना चाहती है भाजपा"

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए 'गेरीमेंडरिंग' (चुनावी क्षेत्रों के साथ छेड़छाड़) का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:

सीटों का खेल: "भाजपा लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 के करीब ले जाना चाहती है क्योंकि उन्हें पता है कि वे निष्पक्ष तरीके से दोबारा नहीं जीत सकते।"

देश को खतरा: ममता ने चेतावनी दी कि यह कदम प्रशासनिक नहीं, बल्कि देश के अस्तित्व के लिए खतरा है, जिससे भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाएगा।

जनसंख्या नियंत्रण की सजा: उन्होंने तर्क दिया कि बंगाल और दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है। परिसीमन के जरिए इन राज्यों की राजनीतिक अहमियत कम कर उत्तर भारतीय राज्यों (Bovine Belt) को फायदा पहुँचाने की कोशिश हो रही है।

महिला आरक्षण की आड़ में सियासत

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उन्हें महिला आरक्षण से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भाजपा ने इसका इस्तेमाल 'परिसीमन बिल' को छिपाने के लिए एक ढाल के रूप में किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "वे हमारे देश को पहचानने लायक नहीं छोड़ेंगे। वे वह सब छीन लेना चाहते हैं जो हमें प्रिय है।"

विपक्षी एकता और 'बदले की राजनीति' का आरोप

मुख्यमंत्री ने इस लड़ाई को अब दिल्ली तक ले जाने का संकल्प लिया:

विपक्षी गठबंधन: ममता बनर्जी ने बताया कि वे एम.के. स्टालिन, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं के साथ निरंतर संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी बंगाल के जंगल महल जिलों में उनके लिए चुनाव प्रचार करेंगे।

एजेंसियों का दुरुपयोग: केंद्र पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक रूप से लड़ने के बजाय ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। टीएमसी कार्यालयों और उम्मीदवारों के घरों पर छापेमारी 'राजनीतिक प्रतिशोध' है।

"चाहे कुछ भी कर लो, तुम सत्ता में नहीं रहोगे। इसमें केवल एक सेकंड लगता है। न्याय की घंटी देर-सबेर हवा से भी बज उठती है। बंगाल जीतने के बाद हम दिल्ली से तुम्हारी सरकार गिरा देंगे।" — ममता बनर्जी

निष्कर्ष

परिसीमन बिल का गिरना तृणमूल कांग्रेस और एकजुट विपक्ष के लिए एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। ममता बनर्जी के इस आक्रामक रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनाव अब केवल नीतिगत नहीं, बल्कि 'अस्तित्व और क्षेत्रीय स्वाभिमान' की लड़ाई बन गए हैं।

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