'सस्ते इलाज' से 'प्रीमियम सर्विस' तक: वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय मेडिकल टूरिज्म ने बदली अपनी रणनीति

'सस्ते इलाज' से 'प्रीमियम सर्विस' तक: वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय मेडिकल टूरिज्म ने बदली अपनी रणनीति नई दिल्ली | समाचार ब्यूरो भारत का हेल्थकेयर सेक्टर एक ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते कूटनीतिक तनाव और एशियाई देशों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, भारत अब केवल 'सस्ता इलाज' मुहैया कराने वाले देश की छवि से बाहर निकल रहा है। देश के बड़े अस्पताल और सरकार अब भारत को एक हाई-टेक, अत्याधुनिक और भरोसेमंद ग्लोबल मेडिकल हब के रूप में स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। आंकड़ों में उतार-चढ़ाव: कूटनीति का असर इमिग्रेशन ब्यूरो के हालिया आंकड़े बताते हैं कि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में कुछ अस्थायी चुनौतियां आई हैं। मरीजों की संख्या: जहाँ 2019 में रिकॉर्ड 6.97 लाख विदेशी मरीज भारत आए थे, वहीं जनवरी से नवंबर 2025 के बीच यह संख्या 4,50,633 रही है। पड़ोसी देशों का प्रभाव: भारत के मेडिकल टूरिज्म का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश से आता है। वहां के राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण आवाजाही में कमी आई है। 2024 में जहां 17.5 लाख बांग्लादेशी भारत आए थे, वहीं 2025 में नवंबर तक यह संख्या घटकर करीब 4.66 लाख रह गई है। एशियाई देशों से 'हेल्दी' मुकाबला थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देश वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मरीजों को लुभाने के लिए बेहतरीन सुविधाएं दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अपनी मार्केटिंग रणनीति में बदलाव करना होगा। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया के महानिदेशक गिरधर ज्ञानी के अनुसार, वीजा प्रक्रियाओं में सुगमता और कूटनीतिक स्थिरता इस क्षेत्र को फिर से रफ्तार देने के लिए अनिवार्य है। रणनीति 2.0: अब फोकस तकनीक और भरोसे पर भारत अब खुद को एक 'प्रीमियम हेल्थकेयर ब्रांड' के रूप में पेश कर रहा है। नई रणनीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: जटिल सर्जरी में महारत: कैंसर, कार्डियोलॉजी (हृदय रोग) और न्यूरोसर्जरी जैसी जटिल बीमारियों के लिए विश्वस्तरीय तकनीक का उपयोग। हाई-टेक बुनियादी ढांचा: रोबोटिक सर्जरी और AI आधारित डायग्नोस्टिक्स पर निवेश। प्रतीक्षा समय में कमी: अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए 'फास्ट ट्रैक' इलाज सुनिश्चित करना। क्या कहते हैं इंडस्ट्री के दिग्गज? देश के प्रमुख अस्पतालों के नेतृत्व को भविष्य से काफी उम्मीदें हैं: "अंतरराष्ट्रीय तनाव क्षणिक है। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में श्रीलंका, इंडोनेशिया और सीआईएस (CIS) देशों से मांग में भारी उछाल आएगा।" — सुनीता रेड्डी, एमडी, अपोलो हॉस्पिटल्स "वैश्विक बदलाव हमारे लिए नए अवसर ला रहे हैं। यदि वीजा व्यवस्था को और सरल बना दिया जाए, तो भारत का मेडिकल टूरिज्म नई ऊंचाइयों को छुएगा।" — अभय सोई, चेयरमैन, मैक्स हेल्थकेयर निष्कर्ष भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर अब केवल 'किफायती' होने का दावा नहीं कर रहा, बल्कि 'सर्वश्रेष्ठ' होने की दिशा में बढ़ रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के दम पर भारत वैश्विक मंच पर अपनी एक ऐसी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है, जहाँ गुणवत्ता और भरोसा सर्वोपरि होगा। इमिग्रेशन ब्यूरो के हालिया आंकड़े बताते हैं कि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में कुछ अस्थायी चुनौतियां आई हैं।

18 Apr 2026  |  7

 

नई दिल्ली | समाचार ब्यूरो भारत का हेल्थकेयर सेक्टर एक ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते कूटनीतिक तनाव और एशियाई देशों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, भारत अब केवल 'सस्ता इलाज' मुहैया कराने वाले देश की छवि से बाहर निकल रहा है। देश के बड़े अस्पताल और सरकार अब भारत को एक हाई-टेक, अत्याधुनिक और भरोसेमंद ग्लोबल मेडिकल हब के रूप में स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं।

आंकड़ों में उतार-चढ़ाव: कूटनीति का असर

इमिग्रेशन ब्यूरो के हालिया आंकड़े बताते हैं कि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में कुछ अस्थायी चुनौतियां आई हैं।

मरीजों की संख्या: जहाँ 2019 में रिकॉर्ड 6.97 लाख विदेशी मरीज भारत आए थे, वहीं जनवरी से नवंबर 2025 के बीच यह संख्या 4,50,633 रही है।

पड़ोसी देशों का प्रभाव: भारत के मेडिकल टूरिज्म का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश से आता है। वहां के राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण आवाजाही में कमी आई है। 2024 में जहां 17.5 लाख बांग्लादेशी भारत आए थे, वहीं 2025 में नवंबर तक यह संख्या घटकर करीब 4.66 लाख रह गई है।

एशियाई देशों से 'हेल्दी' मुकाबला

थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देश वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मरीजों को लुभाने के लिए बेहतरीन सुविधाएं दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अपनी मार्केटिंग रणनीति में बदलाव करना होगा। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया के महानिदेशक गिरधर ज्ञानी के अनुसार, वीजा प्रक्रियाओं में सुगमता और कूटनीतिक स्थिरता इस क्षेत्र को फिर से रफ्तार देने के लिए अनिवार्य है।

रणनीति 2.0: अब फोकस तकनीक और भरोसे पर

भारत अब खुद को एक 'प्रीमियम हेल्थकेयर ब्रांड' के रूप में पेश कर रहा है। नई रणनीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

जटिल सर्जरी में महारत: कैंसर, कार्डियोलॉजी (हृदय रोग) और न्यूरोसर्जरी जैसी जटिल बीमारियों के लिए विश्वस्तरीय तकनीक का उपयोग।

हाई-टेक बुनियादी ढांचा: रोबोटिक सर्जरी और AI आधारित डायग्नोस्टिक्स पर निवेश।

प्रतीक्षा समय में कमी: अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए 'फास्ट ट्रैक' इलाज सुनिश्चित करना।

क्या कहते हैं इंडस्ट्री के दिग्गज?

देश के प्रमुख अस्पतालों के नेतृत्व को भविष्य से काफी उम्मीदें हैं:

"अंतरराष्ट्रीय तनाव क्षणिक है। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में श्रीलंका, इंडोनेशिया और सीआईएस (CIS) देशों से मांग में भारी उछाल आएगा।" — सुनीता रेड्डी, एमडी, अपोलो हॉस्पिटल्स

"वैश्विक बदलाव हमारे लिए नए अवसर ला रहे हैं। यदि वीजा व्यवस्था को और सरल बना दिया जाए, तो भारत का मेडिकल टूरिज्म नई ऊंचाइयों को छुएगा।" — अभय सोई, चेयरमैन, मैक्स हेल्थकेयर

निष्कर्ष

भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर अब केवल 'किफायती' होने का दावा नहीं कर रहा, बल्कि 'सर्वश्रेष्ठ' होने की दिशा में बढ़ रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के दम पर भारत वैश्विक मंच पर अपनी एक ऐसी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है, जहाँ गुणवत्ता और भरोसा सर्वोपरि होगा।

अन्य खबरें