नई दिल्ली | समाचार ब्यूरो केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों में किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने और उन्हें 'डिस्ट्रेस सेल' (मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचना) से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य कृषि मंत्रियों के साथ एक वर्चुअल बैठक के बाद इन प्रस्तावों को मंजूरी दी।
उत्तर प्रदेश: आलू किसानों के लिए ₹203 करोड़ का राहत पैकेज
उत्तर प्रदेश के आलू किसानों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन प्राइस (MIP) के तहत खरीद को हरी झंडी दी है:
खरीद का लक्ष्य: केंद्र ने यूपी में 20 लाख टन आलू की खरीद को मंजूरी दी है।
कीमत: यह खरीद ₹6,500.90 प्रति टन की दर से की जाएगी।
लागत: इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी खजाने पर ₹203.15 करोड़ का बोझ आएगा।
आंध्र प्रदेश: चने की खरीद सीमा में बढ़ोतरी
आंध्र प्रदेश के चना (Gram) उत्पादक किसानों के लिए भी एक अच्छी खबर आई है। कृषि मंत्रालय ने खरीद की मौजूदा सीमा (Cap) को बढ़ा दिया है:
नई सीमा: अब राज्य में 1.13 लाख टन चने की खरीद की जा सकेगी।
पुरानी सीमा: पहले यह सीमा 94,500 टन निर्धारित थी। इस बढ़ोतरी से उन हजारों किसानों को लाभ मिलेगा जिनकी फसल सरकारी केंद्रों पर लिमिट खत्म होने के कारण नहीं खरीदी जा पा रही थी।
कर्नाटक: तुअर की खरीद की समय-सीमा बढ़ी
कर्नाटक में तुअर (Arhar) की फसल के बंपर उत्पादन और पीक हार्वेस्ट सीजन को देखते हुए, सरकार ने प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत समय-सीमा बढ़ाने का फैसला किया है:
नया समय: अब कर्नाटक के किसान 15 मई तक अपनी तुअर की फसल एमएसपी (MSP) पर बेच सकेंगे।
उद्देश्य: इस विस्तार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सप्लाई बढ़ने के दौरान स्थानीय मंडियों में दाम गिरने पर भी किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।
"किसानों को नहीं होने देंगे मजबूर"
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ये फैसले उन चिंताओं को देखते हुए लिए गए हैं जहाँ पीक हार्वेस्ट के दौरान आवक बढ़ने से कीमतें एमएसपी से नीचे चली जाती हैं।
"हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनके पसीने की पूरी कीमत मिले। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी किसान को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।" — कृषि मंत्रालय
निष्कर्ष
सरकार के इन कदमों को आगामी चुनावी और आर्थिक परिदृश्य में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में आलू और आंध्र में चने की अतिरिक्त खरीद से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और खुले बाजार में कीमतों में स्थिरता आएगी।