'नारी शक्ति' के अपमान पर भड़की भाजपा: महिला आरक्षण बिल गिरने पर राहुल गांधी के घर तक जोरदार प्रदर्शन

महिला आरक्षण बिल के विफलता के लिए कांग्रेस और विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराते हुए भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली की सड़कों पर भारी शक्ति प्रदर्शन किया। कई वरिष्ठ नेताओं और महिला सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास तक मार्च निकालकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

18 Apr 2026  |  4

 

नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल (131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026) के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस विफलता के लिए कांग्रेस और विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराते हुए भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली की सड़कों पर भारी शक्ति प्रदर्शन किया। कई वरिष्ठ नेताओं और महिला सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास तक मार्च निकालकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

सड़क से सोशल मीडिया तक 'धोखेबाज' के पोस्टर

भाजपा ने इस प्रदर्शन को केवल सड़कों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्टी ने विपक्षी नेताओं को 'धोखेबाज' बताते हुए पोस्टर साझा किए और स्पष्ट कहा कि देश की आधी आबादी इस 'विश्वासघात' को कभी माफ नहीं करेगी।

काली पट्टी और काले झंडे: प्रदर्शन के दौरान महिला सांसदों और कार्यकर्ताओं ने माथे पर काली पट्टी बांधकर और हाथों में काले झंडे लेकर विरोध जताया।

प्रमुख चेहरों की मौजूदगी: इस मार्च में फिल्म अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी, बांसुरी स्वराज, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, कमलजीत सहरावत और मंजू शर्मा जैसे दिग्गज शामिल हुए।

"फूल नहीं चिंगारी हैं..." के नारों से गूंजी दिल्ली

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही दिल्ली की नेता रेखा गुप्ता ने जोश भरते हुए नारे लगाए— "फूल नहीं चिंगारी हैं, हम भारत की नारी हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने जानबूझकर महिलाओं को उनके हक से वंचित रखा है।

निर्मला सीतारमण का तीखा प्रहार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी और एमके स्टालिन की राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष के इस अड़ियल रुख के कारण संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलने का ऐतिहासिक अवसर हाथ से निकल गया।

विफलता का गणित: क्यों नहीं बन पाया कानून?

2026 के इस ऐतिहासिक बिल को पारित होने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन यह जादुई आंकड़ा नहीं छू सका:

पक्ष में वोट: 298

विरोध में वोट: 230

परिणाम: जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण बिल गिर गया।

विवाद की जड़: जहाँ सरकार इसे महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष का तर्क है कि इसे परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ना राज्यों के संघीय संतुलन के खिलाफ है। फिलहाल, इस विधायी हार ने 2026 की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है।

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