नोएडा/तिरुचिरापल्ली: नोएडा पुलिस और उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) के संयुक्त ऑपरेशन ने 'नोएडा हिंसा' के दूसरे मुख्य साजिशकर्ता, इंजीनियर आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से धर दबोचा है। वेतन वृद्धि की आड़ में हिंसा भड़काने वाला यह आरोपी पिछले कई दिनों से फरार था और इस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पहचान छिपाने के लिए बदला हुलिया
गिरफ्तारी से बचने के लिए आदित्य आनंद ने फिल्मी अंदाज में अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी। पुलिस के अनुसार:
उसने अपने लंबे बाल कटवा दिए थे।
वह हमेशा टोपी लगाकर और टी-शर्ट के ऊपर शर्ट पहनकर पुलिस को चकमा दे रहा था।
वह दिल्ली से ट्रेन के जरिए तमिलनाडु पहुँचा था और वहां से केरल के रास्ते समुद्र मार्ग से विदेश भागने की योजना बना रहा था।
सर्विलांस और सटीक ट्रैकिंग से मिली सफलता
आदित्य आनंद बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है और NIT जमशेदपुर से बीटेक पास है। शनिवार को जैसे ही उसकी टावर लोकेशन तिरुचिरापल्ली में मिली, पुलिस की टीमों ने रेलवे स्टेशन और बस अड्डों की घेराबंदी कर दी। आखिरकार उसे रेलवे स्टेशन से हिरासत में ले लिया गया। पुलिस अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर नोएडा ला रही है।
साजिश का मुख्य चेहरा: हिंसा से पहले ही बिछाया था जाल
जांच में सामने आया कि आदित्य 31 मार्च को नोएडा आया था और सेक्टर 37 में किराए पर कमरा लिया था।
श्रमिकों को भड़काना: वह मुख्य आरोपी रूपेश राय के साथ मिलकर श्रमिकों के प्रदर्शनों में शामिल हुआ।
हिंसा का सूत्रधार: आरोप है कि वेतन बढ़ने के बावजूद उसने श्रमिकों को उकसाया, जिसके कारण 13 अप्रैल को भीषण हिंसा हुई।
नेटवर्क और फंडिंग: पुलिस अब आदित्य और रूपेश राय को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। उनके मोबाइल और चैट के जरिए इस हिंसा के पीछे मौजूद किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क या विदेशी फंडिंग की भी जांच की जाएगी।
अब तक की कार्रवाई
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने स्पष्ट किया है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
अब तक 1,140 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्य साजिशकर्ता रूपेश राय पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
इस मामले में कुल 13 मुकदमे दर्ज हैं।
"श्रमिकों के प्रदर्शन की आड़ में शहर की शांति भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही इस साजिश में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा।" — लक्ष्मी सिंह, पुलिस आयुक्त