समालखा। हरियाणा की समालखा अनाज मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं की मार झेल रही है। एक तरफ मंडी में गेहूं की आवक जारी है, तो दूसरी तरफ खरीद एजेंसियों के पास 'बारदाने' (खाली कट्टे) की भारी किल्लत ने उठान और भराई की प्रक्रिया को पूरी तरह ठप कर दिया है। वर्तमान में मंडी के चबूतरों और सड़कों पर लाखों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा है, जिसे बदलते मौसम के कारण भीगने और खराब होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
आंकड़ों में मंडी का हाल: 79% उठान अभी बाकी
मंडी के ताजा आंकड़े बताते हैं कि खरीद एजेंसियां गेहूं की आवक को संभालने में नाकाम साबित हो रही हैं:
कुल आवक: अब तक मंडी में 7,73,125 क्विंटल गेहूं पहुँच चुका है।
खुले में पड़ा अनाज: लगभग 4.73 लाख क्विंटल गेहूं वर्तमान में मंडी में मौजूद है, जिसका बड़ा हिस्सा खुले आसमान के नीचे पड़ा है।
उठान की सुस्त रफ्तार: अब तक हुई कुल 5.99 लाख क्विंटल की खरीद में से केवल 1.26 लाख क्विंटल का ही उठान हो पाया है। यानी करीब 78.97% गेहूं अभी भी गोदामों तक नहीं पहुँच सका है।
एजेंसियों के पास बारदाना खत्म, आढ़ती परेशान
मंडी में सबसे गंभीर स्थिति खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और हैफेड की है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग: विभाग ने एक लाख क्विंटल से अधिक की खरीद तो कर ली है, लेकिन आढ़तियों को अभी तक बारदाना उपलब्ध नहीं कराया गया है।
हैफेड: हैफेड के पास भी लगभग एक लाख बारदानों की कमी है। हालांकि शुक्रवार को 50 हजार बारदाने भेजे गए थे, लेकिन किसी तकनीकी कारण से उन्हें वापस मंगा लिया गया।
हरियाणा वेयर हाउस: इस एजेंसी ने केवल बारदाने की उपलब्धता के अनुसार ही खरीद की है, जिससे उनका प्रबंधन कुछ हद तक बेहतर है।
किसानों और आढ़तियों में 'भीगने' का डर
मौसम विभाग की चेतावनी और आसमान में उमड़ते बादलों को देखकर किसानों और आढ़तियों की रूह कांप रही है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान बलजीत सिंह ने बताया कि बारदाने के अभाव में न तो गेहूं की भराई हो पा रही है और न ही उठान। यदि बारिश होती है, तो किसानों की छह महीने की मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी।
प्रशासन का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्केट कमेटी की सचिव सविता जैन ने कहा है कि रविवार को सभी खरीद एजेंसियों के मुखियाओं से इस विषय पर विशेष चर्चा की जाएगी। प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द बारदाने की व्यवस्था कर खुले में रखे गेहूं को सुरक्षित किया जाए।
एक नजर में उठान की स्थिति:
हैफेड: 24.77 प्रतिशत उठान।
हरियाणा वेयर हाउस: 34.90 प्रतिशत उठान।
FCI: 945 क्विंटल की खरीद और शत-प्रतिशत उठान।
निष्कर्ष: समालखा मंडी की यह स्थिति सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट कर रही है। यदि अगले 24 घंटों में बारदाने की आपूर्ति नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये का सोना (गेहूं) बर्बाद होने की कगार पर है।