नागपुर | नागपुर के उत्तर-पश्चिम इलाके में बच्चों के भविष्य संवारने के नाम पर चल रहे एक NGO का काला सच सामने आया है। मनकापुर पुलिस ने संस्था के प्रमुख रियाज फाजिल काजी को युवतियों के यौन उत्पीड़न और उन पर धार्मिक दबाव बनाने के आरोपों में गिरफ्तार किया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राज्य की आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) भी जांच में शामिल हो गई है।
HR हेड की आपबीती: 'बर्थडे' पर शुरू हुआ प्रताड़ना का सिलसिला
मामले का खुलासा तब हुआ जब संस्था की 23 वर्षीय एडमिनिस्ट्रेशन और HR हेड ने साहस जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के अनुसार:
जुलाई 2024: पीड़िता के जन्मदिन पर कार्यालय में जश्न के बाद, काजी ने उसे केबिन में बुलाकर जबरन गले लगाया और अश्लील हरकतें कीं।
साक्ष्यों से छेड़छाड़: आरोपी अक्सर केबिन के CCTV का प्लग निकालकर पीड़िता को प्रताड़ित करता था। विरोध करने पर वह नौकरी से निकालने की धमकी और बदतमीजी पर उतारू हो जाता था।
फर्जी सोशल मीडिया और जासूसी का जाल
शिकायत में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी महिला स्टाफ और वॉलंटियर्स की निजी जिंदगी पर नजर रखने के लिए फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल करता था। वह कर्मचारियों की हर हरकत की जासूसी करता था ताकि उन्हें मानसिक रूप से अपने नियंत्रण में रख सके।
धार्मिक पहचान मिटाने का दबाव
पीड़िता की बड़ी बहन, जो NGO में असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर थी, ने आरोप लगाया कि काजी उन पर एक विशिष्ट धर्म की प्रार्थनाएं करने और खास तरह के कपड़े पहनने का दबाव डालता था। कई अन्य पूर्व कर्मचारियों ने भी गवाही दी है कि आरोपी दूसरे धर्म के होने के बावजूद उन्हें अपनी धार्मिक रीतियां थोपने के लिए मजबूर करता था।
ATS की एंट्री: क्या है वित्तीय कनेक्शन?
यह मामला केवल यौन शोषण तक सीमित नहीं रह गया है। हाल ही में नासिक और अमरावती में हुई समान घटनाओं के बाद खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं।
जांच के मुख्य बिंदु:
NGO के वित्तीय लेन-देन और फंडिंग के स्रोत।
गरीब बच्चों को पढ़ाने की आड़ में कोई गुप्त एजेंडा।
आरोपी के संभावित संदिग्ध नेटवर्क और विदेशी संपर्क।
कानूनी कार्रवाई: 23 अप्रैल तक पुलिस रिमांड
मनकापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर हरेश कालसेकर ने बताया कि आरोपी को रविवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों, CCTV फुटेज और अन्य पीड़ितों के बयानों के आधार पर केस को मजबूत कर रही है।
संपादकीय टिप्पणी: समाजसेवा के नाम पर चल रहे ऐसे संस्थान न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और भरोसे को भी चोट पहुँचा रहे हैं। इस मामले में ATS की संलिप्तता एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा कर रही है।