जापान में कुदरत का कोहराम: 7.4 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, सुनामी की चेतावनी के बाद तट खाली करने के आदेश

जापान के उत्तरी हिस्से में भूकंप के अत्यंत तीव्र झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.4 मापी गई है। शक्तिशाली भूकंप का केंद्र सैनरिकु के तट से करीब 100 किलोमीटर दूर समुद्र के भीतर था। भूकंप की गहराई सतह से महज 10 किलोमीटर नीचे आंकी गई है।

20 Apr 2026  |  2

 

टोक्यो: जापान एक बार फिर भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। सोमवार को जापान के उत्तरी हिस्से में भूकंप के अत्यंत तीव्र झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.4 मापी गई है। भूकंप के तुरंत बाद जापान मौसम विज्ञान विभाग ने 'सुनामी' का हाई अलर्ट जारी कर दिया है, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया है।

समुद्र के भीतर था भूकंप का केंद्र

जानकारी के मुताबिक, इस शक्तिशाली भूकंप का केंद्र सैनरिकु के तट से करीब 100 किलोमीटर दूर समुद्र के भीतर था। भूकंप की गहराई सतह से महज 10 किलोमीटर नीचे आंकी गई है। कम गहराई पर आए इतने तीव्र झटके के कारण सुनामी का खतरा काफी बढ़ गया है।

सुनामी की अब तक की स्थिति:

मियाको बंदरगाह: यहाँ सुनामी की पहली लहर 80 सेंटीमीटर ऊंची दर्ज की गई है।

आओमारी प्रांत: सरकारी प्रसारक NHK के अनुसार, वैज्ञानिकों ने मुख्य द्वीप के उत्तरी भाग में तट से 50 किमी दूर सुनामी की लहरें देखी हैं।

खतरे वाले क्षेत्र: होक्काइडो और इवाते प्रांतों के लिए भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई है।

प्रधानमंत्री की अपील: "ऊंचे स्थानों की ओर भागें"

जापान की प्रधानमंत्री सना तकाएची ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन आदेश जारी किए हैं। उन्होंने तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों से तुरंत घर खाली कर ऊंचे स्थानों (High Grounds) पर जाने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से संकट की इस घड़ी में धैर्य बनाए रखने और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने को कहा है।

परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर कड़ी नजर

भूकंप के झटकों के बाद जापान ने अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (Nuclear Power Plants) की सुरक्षा बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम ओनागावा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की बारीकी से जांच कर रही है ताकि किसी भी संभावित रिसाव या तकनीकी खराबी को समय रहते रोका जा सके। फिलहाल किसी बड़ी अनहोनी की खबर नहीं मिली है।

जापान और भूकंप का गहरा नाता

जापान दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे भौगोलिक कारण जिम्मेदार हैं:

रिंग ऑफ फायर: जापान प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जहाँ टेक्टॉनिक प्लेट्स लगातार आपस में टकराती रहती हैं।

चार प्लेटों का मिलन: यह देश चार बड़ी टेक्टॉनिक प्लेटों के संगम पर बसा है।

भूकंपों का इतिहास: केवल 2025 में ही जापान में 1500 से ज्यादा छोटे-बड़े झटके महसूस किए गए थे। इस साल भी अब तक 6 तीव्रता से अधिक के तीन बड़े झटके लग चुके हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में समुद्र के बीच से जहाजों को जान बचाकर तटों की ओर भागते देखा जा सकता है। राहत और बचाव दल को अलर्ट मोड पर रखा गया है और अगले कुछ घंटे जापान के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।

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