चुनावी डेब्यू से पहले अभिनेता विजय को बड़ा झटका: हलफनामे में ₹100 करोड़ की गड़बड़ी, मद्रास हाई कोर्ट ने IT विभाग से मांगा जवाब

मद्रास हाई कोर्ट ने विजय द्वारा दाखिल चुनावी हलफनामों में ₹100 करोड़ से अधिक की आय संबंधी विसंगति पाई है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आयकर विभाग (Income Tax Department) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

20 Apr 2026  |  4

 

चेन्नई: दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार और 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) के संस्थापक विजय की राजनीतिक पारी शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। मद्रास हाई कोर्ट ने विजय द्वारा दाखिल चुनावी हलफनामों में ₹100 करोड़ से अधिक की आय संबंधी विसंगति पाई है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आयकर विभाग (Income Tax Department) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

दो सीटों पर अलग-अलग आय का दावा

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पेरम्बूर निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदाता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आरोप लगाया गया कि विजय ने दो अलग-अलग विधानसभा सीटों—त्रिची और पेरम्बूर—से नामांकन दाखिल किया है, लेकिन दोनों हलफनामों में उनकी आय के आंकड़ों में भारी अंतर है।

हलफनामों का गणित:

त्रिची सीट: यहाँ दाखिल कागजों में विजय ने अपनी आय ₹220 करोड़ घोषित की।

पेरम्बूर सीट: यहाँ के हलफनामे में उन्होंने अपनी आय मात्र ₹115 करोड़ दिखाई।

कुल अंतर: दोनों हलफनामों के बीच ₹105 करोड़ का बड़ा अंतर पाया गया है।

राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल?

तमिलनाडु की राजनीति में अपनी नई पार्टी TVK के साथ कदम रख रहे विजय के लिए यह कानूनी पेच एक बड़ा झटका माना जा रहा है। राज्य में इस बार का चुनाव त्रिकोणीय होने की संभावना है, जहाँ विजय का मुकाबला सीधे तौर पर सत्ताधारी DMK से है।

त्रिची पूर्व: यहाँ विजय का मुकाबला DMK के इनीगो एस. इरुदयाराज से है। यह क्षेत्र DMK का गढ़ माना जाता है, लेकिन अल्पसंख्यक वोटों के आधार पर विजय उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं।

पेरम्बूर: यहाँ उनका मुकाबला वर्तमान विधायक आर.डी. शेखर से है।

विजय की चुनावी रणनीति और समीकरण

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय के चुनावी मैदान में उतरने से तमिलनाडु में वोटों का ध्रुवीकरण बदल सकता है।

अल्पसंख्यक और मछुआरा वोट: विजय ने अपना ध्यान तटीय इलाकों और रामनाथपुरम जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित किया है, ताकि मछुआरा समुदाय और अल्पसंख्यकों को अपने पाले में लाया जा सके।

त्रिकोणीय मुकाबला: दलित और हिंदू मतों के साथ-साथ अल्पसंख्यक वोटों में बंटवारा DMK और AIADMK जैसी स्थापित पार्टियों के समीकरण बिगाड़ सकता है।

आगे क्या?

मद्रास हाई कोर्ट ने आयकर विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। यदि विजय इन विसंगतियों का ठोस आधार पेश नहीं कर पाते, तो उनकी उम्मीदवारी पर संकट आ सकता है। फिलहाल, इस कानूनी कार्यवाही ने तमिलनाडु की चुनावी सरगर्मी को और तेज कर दिया है।

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