मिडिल ईस्ट में महाशक्ति को चुनौती: UAE और अमेरिका के रिश्तों में 'दरार', सैन्य बेस हटाने और 'युआन' में व्यापार की चेतावनी

UAE और वाशिंगटन के बीच रिश्तों में ऐतिहासिक कड़वाहट पैदा हो गई है। ईरान के साथ बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच UAE ने अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता खत्म करने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने साफ कहा कि अमेरिकी सैन्य बेस अब रणनीतिक संपत्ति (Asset) नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए खतरा (Liability) बन गए हैं।

20 Apr 2026  |  12

 

अबू धाबी/वाशिंगटन: दशकों से अमेरिका के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और वाशिंगटन के बीच रिश्तों में ऐतिहासिक कड़वाहट पैदा हो गई है। ईरान के साथ बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच UAE ने अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता खत्म करने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। एमिराती रणनीतिकारों ने मांग की है कि देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद कर दिया जाए, क्योंकि वे अब सुरक्षा के बजाय एक 'बोझ' और ईरान के लिए 'टारगेट' बन गए हैं।

'हमें अमेरिकी फौज की जरूरत नहीं': अब्दुल खालिक अब्दुल्ला

UAE के प्रमुख विश्लेषक और रणनीतिक मामलों के जानकार अब्दुल खालिक अब्दुल्ला के एक बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी सैन्य बेस अब रणनीतिक संपत्ति (Asset) नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए खतरा (Liability) बन गए हैं।

अब्दुल्ला का तर्क है कि हाल ही में ईरान द्वारा दागे गए 2,800 से अधिक ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोककर UAE ने अपनी सैन्य संप्रभुता और रक्षा क्षमता सिद्ध कर दी है। UAE का मानना है कि उसे अमेरिका से केवल आधुनिक तकनीक और डिफेंस सिस्टम चाहिए, न कि उनकी स्थायी सेना।

ईरानी हमलों ने बढ़ाया दबाव

तनाव की मुख्य वजह ईरान के वे दावे हैं जिनमें कहा गया कि उसने दुबई स्थित अमेरिकी कमांड सेंटर ‘अल मिन्हाद’ को निशाना बनाया है। यद्यपि अमेरिका ने किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन UAE के भीतर यह धारणा प्रबल हो रही है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों की मौजूदगी के कारण ही देश खामख्वाह ईरान के निशाने पर आ रहा है।

पेट्रो-डॉलर को झटका: 'युआन' का अल्टीमेटम

सैन्य मोर्चे के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी भारी उलटफेर के संकेत हैं। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, UAE ने ट्रंप प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है:

विकल्प के रूप में युआन: यदि युद्ध की स्थिति के कारण डॉलर की आपूर्ति बाधित होती है, तो UAE तेल के व्यापार के लिए चीनी मुद्रा 'युआन' का रुख कर सकता है।

ट्रंप की नीतियों से नाराजगी: एमिराती अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप के ईरान विरोधी फैसलों ने उन्हें लंबी आर्थिक मंदी की ओर धकेला है, जिससे उबरने के लिए अब वे अमेरिका के भरोसे नहीं बैठ सकते।

क्या खत्म होगा अमेरिका का रसूख?

दशकों पुराना 'सुरक्षा के बदले डॉलर में तेल' का समझौता अब टूटने की कगार पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अबू धाबी अपने यहां से अमेरिकी बेस हटा देता है और युआन में तेल बेचना शुरू करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'पेट्रो-डॉलर' के युग के अंत की शुरुआत हो सकती है। यह कदम न केवल अमेरिका के रसूख को मिट्टी में मिला देगा, बल्कि मिडिल ईस्ट में चीन की पैठ को और मजबूत करेगा।

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