चंडीगढ़: शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत 24 महिला कर्मचारियों ने अपने ही एक पुरुष सहकर्मी पर उत्पीड़न और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत दर्ज हुए दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आरोपी और पीड़ित महिलाएं एक ही दफ्तर साझा करने को मजबूर हैं।
"आक्रामकता का एक दस्तावेजी पैटर्न": शिकायत की मुख्य बातें
बीती 12 फरवरी को स्कूल की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को सौंपी गई इस सामूहिक शिकायत में महिलाओं ने आरोपी शिक्षक के व्यवहार को 'असुरक्षित और अपमानजनक' बताया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यह केवल इक्का-दुक्का घटनाएं नहीं हैं, बल्कि उनके साथ लगातार निम्नलिखित व्यवहार किया जा रहा है:
अपमानजनक और लैंगिक भाषा: काम के दौरान अभद्र और लैंगिक रूप से भेदभावपूर्ण शब्दों का प्रयोग।
मौखिक धमकियां: कर्मचारियों को डराना-धमकाना और माहौल को तनावपूर्ण बनाना।
शारीरिक दुस्साहस: महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से समझौता करने वाली अवांछित शारीरिक हरकतें।
जांच की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक चुप्पी
नियमों के अनुसार, ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच के दौरान आरोपी को कार्यस्थल से दूर रखने या स्थानांतरित करने का प्रावधान है, ताकि जांच प्रभावित न हो और पीड़ित सुरक्षित महसूस करें। बावजूद इसके, आरोपी शिक्षक अब भी उसी परिसर में ड्यूटी पर तैनात है।
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को सुलझाने के लिए शिक्षा विभाग ने तीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों और एक वरिष्ठ अधिकारी को मिलाकर एक अलग पैनल गठित किया है। हालांकि, विद्यालय शिक्षा निदेशक नीतीश सिंगला की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है।
पीड़ितों की चेतावनी: "सुरक्षा नहीं तो कानूनी कार्रवाई"
शिकायतकर्ता महिलाओं ने स्पष्ट मांग की है कि जांच निष्पक्ष और त्वरित हो। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अंतरिम सुरक्षात्मक उपाय तुरंत लागू नहीं किए गए और उन्हें उस असुरक्षित वातावरण से मुक्ति नहीं मिली, तो वे आपराधिक कार्यवाही का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगी।
यह मामला न केवल चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर दाग लगाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि 'यौन उत्पीड़न अधिनियम' (POSH Act) के कड़े नियमों के बावजूद धरातल पर क्रियान्वयन कितना चुनौतीपूर्ण है।