हनुमानगढ़/जयपुर: राजस्थान एटीएस (ATS) और जिला पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक बेहद खतरनाक और हाईटेक 'आधार' रैकेट का पर्दाफाश किया है। हनुमानगढ़ के भादरा इलाके से संचालित हो रहे इस गिरोह के तार न केवल साइबर अपराध, बल्कि दिल्ली से लेकर श्रीनगर और खाड़ी देशों तक फैले संदिग्ध टेरर फंडिंग नेटवर्क से भी जुड़े पाए गए हैं।
फर्जीवाड़े का 'अदृश्य' खेल: कश्मीरी संदिग्धों के बने फर्जी दस्तावेज
एटीएस की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह है क्षेत्रीय पहचान की हेराफेरी। गिरोह राजस्थान के गांवों के पते और नाम का उपयोग करता था, लेकिन बायोमेट्रिक और फोटो कश्मीरी संदिग्धों के लगाए जा रहे थे।
संदिग्ध नेटवर्क: इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए जारी किए गए प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड का इस्तेमाल कश्मीर में बैठे हैंडलर्स से संपर्क करने के लिए किया जा रहा था।
टेरर फंडिंग: जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन्हीं फर्जी आधार कार्डों के जरिए खोले गए बैंक खातों में खाड़ी देशों से संदिग्ध फंड ट्रांसफर किया जा रहा है।
बायोमेट्रिक को धोखा: सिलिकॉन अंगूठे और रबर फिंगरप्रिंट
मुख्य आरोपी कुलदीप शर्मा ने बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणाली को मात देने के लिए किसी जासूसी फिल्म जैसी तकनीक अपनाई थी। छापेमारी में बरामद सामान तकनीक के दुरुपयोग की भयावह तस्वीर पेश करता है:
क्लोन फिंगरप्रिंट: मौके से 150 से अधिक सिलिकॉन क्लोन (रबर थंब) बरामद हुए हैं। इनका उपयोग रात के समय पोर्टल लॉग-इन करने के लिए किया जाता था।
रेटिना स्कैन में धोखाधड़ी: आँखों की पुतलियों (Iris) के सत्यापन के लिए कागज पर प्रिंट की गई हाई-डेफिनिशन तस्वीरों का इस्तेमाल कर डिवाइस को चकमा दिया जा रहा था।
जब्ती: पुलिस ने 12 लैपटॉप और 500 से अधिक सिम कार्ड बरामद किए हैं।
देशव्यापी नेटवर्क और आंतरिक मिलीभगत की आशंका
एटीएस की जांच के अनुसार, इस सेंटर की आधिकारिक लोकेशन गुजरात दर्ज थी, लेकिन इसे अवैध रूप से हनुमानगढ़ में चलाया जा रहा था। इस पूरे खेल में जसवंत और आमिर खान नामक ऑपरेटरों की आईडी का इस्तेमाल हुआ है, जिनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है।
एजेंसियों का बढ़ता दायरा:
अधिकारियों पर रडार: DOIT आधार कार्यालय के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यह जांच की जा रही है कि इतने बड़े स्तर पर डेटाबेस में सेंध बिना किसी अंदरूनी मदद के कैसे संभव हुई।
मल्टी-सिटी ऑपरेशन: हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जयपुर, दिल्ली और बीकानेर में एक साथ दबिश दी जा रही है। दिल्ली के कुछ संवेदनशील इलाकों में भी छापेमारी की गई, जहां संदिग्ध फरार पाए गए।
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता: पासपोर्ट और अवैध निकास
एटीएस को आशंका है कि इस गैंग ने न केवल बैंक खाते और सिम कार्ड दिलवाए, बल्कि कई अपराधियों को फर्जी पासपोर्ट बनवाकर देश से बाहर भागने में भी मदद की है। वर्तमान में आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पिछले एक साल में बनाए गए सभी फर्जी दस्तावेजों की सूची तैयार की जा सके।
"यह केवल एक दस्तावेजी धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। हम इस सिंडिकेट के अंतिम छोर तक पहुँचने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" — एटीएस सूत्रों का बयान