UP के छात्र कार्तिक के हत्यारे को आजीवन कारावास: कनाडा की अदालत से मिला इंसाफ

टोरंटो उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेन केली ने आरोपी रिचर्ड एडविन को दो अलग-अलग हत्याओं (7 और 9 अप्रैल 2022) के लिए प्रथम श्रेणी हत्या (First-Degree Murder) का दोषी पाया। कनाडा की एक अदालत ने भारतीय छात्र कार्तिक वासुदेव की निर्मम हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी रिचर्ड एडविन को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।

21 Apr 2026  |  14

 

टोरंटो/गाजियाबाद: कनाडा की एक अदालत ने भारतीय छात्र कार्तिक वासुदेव की निर्मम हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी रिचर्ड एडविन को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानसिक बीमारी के बावजूद आरोपी अपने कृत्य की गंभीरता और उसके परिणामों को समझने में पूरी तरह सक्षम था।

अदालत का कड़ा रुख: NCR याचिका खारिज

टोरंटो उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेन केली ने आरोपी रिचर्ड एडविन को दो अलग-अलग हत्याओं (7 और 9 अप्रैल 2022) के लिए प्रथम श्रेणी हत्या (First-Degree Murder) का दोषी पाया।

बचाव पक्ष की दलील: बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि आरोपी 'सिजोफ्रेनिया' से पीड़ित था और सही-गलत की पहचान करने की स्थिति में नहीं था, इसलिए उसे आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं (NCR) माना जाना चाहिए।

न्यायाधीश का फैसला: अदालत ने माना कि आरोपी बीमार जरूर था, लेकिन जिस तरह उसने वारदातों को अंजाम दिया, उससे साबित होता है कि वह अपने कार्यों की प्रकृति जानता था। अदालत ने उसे बिना पैरोल की संभावना के आजीवन कारावास की सजा दी।

क्या था पूरा मामला?

गाजियाबाद के राजेंद्र नगर निवासी 21 वर्षीय कार्तिक वासुदेव जनवरी 2022 में उच्च शिक्षा के लिए कनाडा गए थे। वह टोरंटो के सेनेका कॉलेज में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे थे।

हमले की भयावहता: 7 अप्रैल 2022 को जब कार्तिक शेरबोर्न स्टेशन के पास सीढ़ियों की ओर जा रहे थे, तब आरोपी ने तेजी से उनके पास आकर उनकी पीठ पर कई गोलियां दाग दीं। शुरुआती जांच में इसे लूटपाट की कोशिश बताया गया था।

अंतिम संस्कार: कार्तिक का शव भारत लाया गया था, जहाँ गाजियाबाद में हिंडन नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

पिता का संघर्ष: "4 साल बाद मिला न्याय"

कार्तिक के पिता जितेश वासुदेव ने इस फैसले पर राहत जताई है। उन्होंने बताया कि परिवार ने न्याय के लिए चार साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। फैसले के समय वह और उनकी पत्नी टोरंटो की अदालत में ही मौजूद थे।

"एक पिता के लिए अपने बेटे को खोना सबसे बड़ा दुख है, लेकिन इस फैसले ने हमें यह तसल्ली दी है कि दोषी को उसके किए की सजा मिल गई है।" — जितेश वासुदेव

एक होनहार छात्र का असमय जाना

कार्तिक स्थानीय डीएवी स्कूल के मेधावी छात्र थे। उनके निधन से गाजियाबाद के राजेंद्र नगर इलाके में मातम पसर गया था। इस फैसले के बाद न केवल उनके परिवार ने, बल्कि वहां रह रहे भारतीय छात्र समुदाय ने भी न्याय तंत्र पर भरोसा जताया है।

अन्य खबरें