कैलिफोर्निया (JPL): मानव इतिहास की सबसे दूर स्थित कृत्रिम वस्तु, वॉयजर-1 (Voyager 1), को जीवित रखने के लिए नासा ने एक कड़ा लेकिन आवश्यक फैसला लिया है। ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों को खंगाल रहे इस 47 वर्षीय अंतरिक्ष यान की बिजली बचाने के लिए इसके 'लो-एनर्जी चार्ज्ड पार्टिकल्स' (LECP) प्रयोग को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया है।
मिशन को 2030 तक खींचने की तैयारी
दक्षिणी कैलिफोर्निया स्थित जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) के इंजीनियरों ने 17 अप्रैल को यान को कमांड भेजकर इस उपकरण को बंद किया। नासा का लक्ष्य इस बिजली कटौती के जरिए वॉयजर-1 के जीवनकाल को 2030 के दशक तक बढ़ाना है।
वॉयजर मिशन के मैनेजर करीम बदरुद्दीन ने कहा:
"किसी साइंस इंस्ट्रूमेंट को बंद करना हमारी पसंद नहीं है, लेकिन यान को चालू रखने के लिए यह उपलब्ध विकल्पों में सबसे बेहतर है।"
LECP: 1977 से अब तक का शानदार सफर
बंद किया गया LECP उपकरण यान के प्रक्षेपण (1977) के बाद से लगभग बिना किसी रुकावट के काम कर रहा था। इसका मुख्य कार्य सौर मंडल और हमारी आकाशगंगा से आने वाले कम ऊर्जा वाले आवेशित कणों (जैसे आयन और इलेक्ट्रॉन) और कॉस्मिक किरणों को मापना था। नासा के अनुसार, इस शटडाउन से यान को लगभग एक साल का अतिरिक्त 'ब्रीदिंग रूम' (काम करने का समय) मिलेगा।
लगातार कम होती जा रही है ऊर्जा
वॉयजर-1 और वॉयजर-2 दोनों ही प्लूटोनियम के क्षय से उत्पन्न ऊष्मा से चलते हैं। हर साल इन यानों की बिजली उत्पादन क्षमता में लगभग 4 वॉट की गिरावट आती है।
25 फरवरी, 2026: इससे पहले इंजीनियरों ने वॉयजर-1 के 'कॉस्मिक रे सबसिस्टम' को बंद किया था, जिसने 2012 में हेलियोस्फीयर से बाहर निकलने की पुष्टि की थी।
अब क्या बचा है? यान पर अब केवल दो वैज्ञानिक उपकरण सक्रिय हैं—एक जो प्लाज्मा तरंगों को सुनता है और दूसरा जो चुंबकीय क्षेत्रों को मापता है।
अथाह दूरियों का सफर
वॉयजर-1 वर्तमान में पृथ्वी से 15 अरब मील से भी अधिक दूर है। यह दूरी इतनी अधिक है कि वहां से भेजे गए एक रेडियो सिग्नल को पृथ्वी तक पहुँचने में 23 घंटे से अधिक का समय लगता है। वहीं इसका साथी वॉयजर-2 पृथ्वी से 13 अरब मील दूर सफर कर रहा है।
निष्कर्ष: हालांकि वॉयजर-1 धीरे-धीरे अपनी आंखें और कान (उपकरण) बंद कर रहा है, लेकिन इसका अंततारकीय (Interstellar) अंतरिक्ष से सिग्नल भेजना जारी रखना वैज्ञानिकों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। नासा की यह रणनीति सुनिश्चित करेगी कि यह 'मशीनी दूत' आने वाले कई सालों तक मानव रहित अन्वेषण का झंडा बुलंद रखे।