सांसद पप्पू यादव की बढ़ी मुश्किलें: महिलाओं पर 'विवादित' टिप्पणी के बाद बिहार राज्य महिला आयोग का कड़ा रुख, 3 दिन में मांगा जवाब

महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर की गई उनकी एक टिप्पणी को 'अमर्यादित' मानते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

21 Apr 2026  |  13

 

पटना: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अपने एक हालिया बयान के कारण कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर की गई उनकी एक टिप्पणी को 'अमर्यादित' मानते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने सांसद को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या था पूरा विवाद?

खबरों के मुताबिक, पप्पू यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान समाज और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा था कि "भारत में महिलाओं को देवी का दर्जा तो दिया जाता है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जिसकी वे हकदार हैं।" विवाद तब और गहरा गया जब उन्होंने राजनीति में महिलाओं के प्रवेश और उन्हें पेश आने वाली 'गलत परिस्थितियों' को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें महिला आयोग ने उनकी गरिमा के खिलाफ माना है।

महिला आयोग की सख्त कार्रवाई: नोटिस के मुख्य बिंदु

आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सांसद से कई कड़े सवाल पूछे हैं:

स्पष्टीकरण का आधार: आयोग ने पूछा है कि यह बयान किन परिस्थितियों में दिया गया और इस तरह की टिप्पणी का आधार क्या था?

गरिमा का उल्लंघन: नोटिस में सवाल किया गया है कि उनके बयान को महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध क्यों न माना जाए?

सदस्यता पर खतरा: आयोग ने यहाँ तक पूछा है कि इस आचरण के आधार पर उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश क्यों न की जाए?

सियासी गलियारों में हड़कंप

पप्पू यादव के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने बिहार के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है:

भाजपा और विपक्ष: कई नेताओं ने बयान को अनुचित बताते हुए कहा है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी शब्दावली पर नियंत्रण रखना चाहिए।

समर्थकों का तर्क: वहीं, समर्थकों का कहना है कि सांसद के बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है और वे केवल समाज की कड़वी सच्चाई बता रहे थे।

महिला संगठनों का रुख: अधिकार संगठनों ने आयोग की इस सक्रियता का स्वागत किया है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आगे क्या होगा?

आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो सांसद के विरुद्ध कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। अब सबकी निगाहें पप्पू यादव के जवाब पर टिकी हैं—क्या वे अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगेंगे या इसे वैचारिक बहस का रूप देंगे?

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