ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत की 'शांति' पहल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिए मध्यस्थता के संकेत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को एक बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य एवं कूटनीतिक तनाव को कम करने में भारत भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता अधर में लटक गई है।

22 Apr 2026  |  2

 

नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत एक वैश्विक शांतिदूत के रूप में उभर सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को एक बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य एवं कूटनीतिक तनाव को कम करने में भारत भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित समय आने पर भारत के प्रयास न केवल सार्थक होंगे, बल्कि सफल भी हो सकते हैं।

पीएम मोदी का संतुलित दृष्टिकोण और शांति की अपील

रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से युद्ध को समाप्त करने और संवाद का रास्ता अपनाने की पुरजोर अपील की है। राजनाथ सिंह ने कहा:

"प्रधानमंत्री का अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक मामलों में दृष्टिकोण हमेशा से संतुलित रहा है। समय आने पर भारत इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा।"

पाकिस्तान में वार्ता ठप: परमाणु कार्यक्रम बना बाधा

भारत का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता अधर में लटक गई है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर मतभेद उभर आए हैं, जिसके कारण बातचीत की मेज पर सहमति नहीं बन पा रही है।

ट्रंप का दो सप्ताह का युद्धविराम: पाकिस्तान की रही भूमिका

इस बीच, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को दो सप्ताह के लिए टालने (सीजफायर) का ऐलान किया है।

मध्यस्थता: ट्रंप ने स्वीकार किया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के विशेष अनुरोध पर लिया गया है।

उद्देश्य: इस युद्धविराम का लक्ष्य ईरानी नेतृत्व को एक 'संयुक्त शांति प्रस्ताव' पेश करने के लिए समय देना है।

ईरान का पलटवार: "हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता"

एक तरफ जहाँ अमेरिका इसे बातचीत का अवसर बता रहा है, वहीं ईरान ने इस युद्धविराम को संदेह की दृष्टि से देखा है। ईरानी अधिकारी मेहदी मोहम्मदी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह अमेरिका की केवल वक्त काटने की रणनीति हो सकती है ताकि वह अचानक हमला कर सके। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी:

"हारने वाला पक्ष शर्तें थोपने की स्थिति में नहीं होता। यदि ईरान पर दबाव जारी रहा, तो इसका जवाब कूटनीतिक नहीं बल्कि सैन्य तरीके से दिया जाएगा।"

भारत पर टिकी दुनिया की नजरें

विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि भारत के संबंध वाशिंगटन और तेहरान, दोनों से बेहतर हैं, इसलिए भारत की मध्यस्थता इस गतिरोध को तोड़ने में 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि वैश्विक कूटनीति के इस शतरंज में भारत अपनी अगली चाल कब चलता है।

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