डिजिटल सुरक्षा की ओर बड़ा कदम: अब सोशल मीडिया पर AI कंटेंट और डीपफेक को 'लेबल' करना होगा अनिवार्य

सरकार ने आईटी रूल्स-2021 में संशोधन के लिए एक नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसके तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एआई-जेनरेटेड कंटेंट, डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग पर स्पष्ट 'लेबल' (पहचान) लगाना अनिवार्य होगा।

22 Apr 2026  |  2

 

नई दिल्ली | डिजिटल इंडिया के दौर में बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकार ने आईटी रूल्स-2021 में संशोधन के लिए एक नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसके तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एआई-जेनरेटेड कंटेंट, डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग पर स्पष्ट 'लेबल' (पहचान) लगाना अनिवार्य होगा।

क्या है नया प्रस्ताव?

30 मार्च को जारी मूल ड्राफ्ट में 21 अप्रैल को किए गए अतिरिक्त संशोधनों के अनुसार, इंटरनेट पर मौजूद ऐसा हर कंटेंट जो असली जैसा दिखता है लेकिन उसे एआई की मदद से बनाया या बदला गया है, उसे अब छुपाया नहीं जा सकेगा।

सख्त पहचान: डीपफेक वीडियो, एआई-निर्मित फोटो और वॉइस क्लोनिंग को स्पष्ट रूप से मार्क करना होगा कि यह एआई द्वारा तैयार किया गया है।

सार्वजनिक राय: सरकार ने इस नए ड्राफ्ट पर आम जनता से सुझाव और राय भी मांगी है।

180 दिनों तक डेटा रखना होगा सुरक्षित

नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों (इंटरमीडियरी) की जवाबदेही बढ़ाई गई है। अब इन कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से जुड़े डेटा को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखना होगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों को साक्ष्य उपलब्ध कराए जा सकें।

कंटेंट पर पैनी नजर: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की भूमिका

इस संशोधन के साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को कंटेंट पर कार्रवाई करने के लिए विशेष शक्तियां दी गई हैं:

स्वतंत्र जांच: कुछ गंभीर मामलों में मंत्रालय बिना किसी औपचारिक शिकायत के भी स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू कर सकेगा।

न्यूज कंटेंट का दायरा: समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़े कंटेंट को भी इन नियमों के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि किसी सामान्य यूजर को 'न्यूज पब्लिशर' की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

विशेषज्ञों की राय: "सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं और डीपफेक के बढ़ते खतरों के बीच यह संशोधन एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही भी तय होगी।"

सरकार का यह कदम चुनाव और सामाजिक स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एआई के जरिए फैलाई जा रही फर्जी खबरें वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

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