चंडीगढ़: नशीले पदार्थों की तस्करी (NDPS) के एक मामले में सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोपी को जमानत देते हुए अदालत ने हरियाणा के जेल प्रशासन को आड़े हाथों लिया और कहा कि यदि कैदी जेल के भीतर से मोबाइल फोन के जरिए आपराधिक नेटवर्क चला रहे हैं, तो यह व्यवस्था की विफलता है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला फतेहाबाद के भूना थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें 505 ग्राम हेरोइन की बरामदगी हुई थी। मामले के मुख्य आरोपी मोहन लाल ने पूछताछ में बताया था कि उसने यह खेप दिल्ली में एक विदेशी नागरिक से खरीदी थी और इस वित्तीय लेनदेन में आकाश उर्फ रिंकू (याचिकाकर्ता) समेत अन्य आरोपी शामिल थे।
आकाश की ओर से नियमित जमानत की अर्जी दाखिल करते हुए दलील दी गई कि उसे केवल पुराने पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर फंसाया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि जिस मोबाइल को नष्ट करने का आरोप लगाया गया है, वह उसके पास था ही नहीं क्योंकि वह पहले से ही न्यायिक हिरासत में था।
अदालत की तीखी टिप्पणी: 'लापरवाही या मिलीभगत?'
जस्टिस संजय वशिष्ठ की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा:
"यह अत्यंत चौंकाने वाला और चिंताजनक है कि एक कैदी जेल में रहते हुए बाहर के अपराधियों से मोबाइल पर संपर्क में है और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है। या तो पुलिस के आरोप झूठे हैं या फिर जेल प्रशासन की इसमें गंभीर लापरवाही या मिलीभगत है।"
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हरियाणा जेल प्रशासन को अब 'आत्ममंथन' करने की जरूरत है और इस तरह की चूक के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
जमानत के साथ सख्त निर्देश
अदालत ने याचिकाकर्ता के रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि उस पर कई मामले दर्ज थे, लेकिन एनडीपीएस के अधिकांश मामलों में वह बरी हो चुका है या सजा पूरी कर चुका है। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, लेकिन साथ ही कुछ शर्तें भी रखीं:
भविष्य में निगरानी: यदि आरोपी दोबारा किसी समान आपराधिक गतिविधि में लिप्त पाया जाता है, तो उसकी जमानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी।
त्वरित सुनवाई: ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि इस मामले का निपटारा बिना किसी बाहरी प्रभाव के और शीघ्रता से किया जाए।
निष्कर्ष
हाईकोर्ट का यह आदेश राज्य की जेलों में अवैध मोबाइल फोन के इस्तेमाल और सुरक्षा में सेंधमारी की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब हरियाणा सरकार और जेल विभाग पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने का दबाव बढ़ गया है।