सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की स्थिति को बताया 'असाधारण', न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर जताई कड़ी नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव और उन्हें बंधक बनाए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में I-PAC दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है।

22 Apr 2026  |  12

 

नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक गतिरोध पर देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव और उन्हें बंधक बनाए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। अदालत ने बंगाल की मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को एक 'असाधारण स्थिति' करार दिया है।

"हम जमीनी हकीकत से आंखें नहीं मूंद सकते"

जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे वकीलों को दोटूक शब्दों में कहा कि कानूनी सिद्धांतों से परे राज्य की व्यावहारिक स्थितियां चिंताजनक हैं।

अदालत की टिप्पणी: पीठ ने कहा, "यह एक असाधारण स्थिति है। हमने देखा कि कई न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर रखा गया। आप भले ही अमूर्त कानूनी सिद्धांतों पर बहस करें, लेकिन हम राज्य में उत्पन्न हो रही व्यावहारिक वास्तविकताओं से अपनी आंखें नहीं फेर सकते।"

I-PAC रेड केस: मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में I-PAC दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने इसे लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।

"हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन आएगा, जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री उस दफ्तर में घुस जाएगी जहाँ केंद्रीय जांच एजेंसी काम कर रही हो। यह किसी राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि एक मुख्यमंत्री द्वारा किया गया ऐसा कृत्य है जो पूरे लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा है।" — सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ

मुख्य बिंदु:

न्यायिक सुरक्षा: अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना को अदालत ने न्यायपालिका की गरिमा पर चोट माना है।

संवैधानिक मर्यादा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति जांच की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

अगली सुनवाई: इस संवेदनशील मामले पर विस्तृत सुनवाई कल के लिए तय की गई है।

अदालत की इन टिप्पणियों ने पश्चिम बंगाल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

अन्य खबरें