नई दिल्ली | भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को 'फ्यूचर-रेडी' बनाने के लिए एक बड़े युगांतकारी परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। दशकों तक सेना की आर्टिलरी की पहचान रहे रूसी मूल के BM-21 'ग्रैड' (Grad) रॉकेट लॉन्चर अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहे हैं। सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की जंग अब पुराने सोवियत हथियारों के भरोसे नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वदेशी और अत्याधुनिक पिनाका (Pinaka) मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम के दम पर लड़ी जाएगी।
2026 तक सेना की नई 'फायरपावर': 10 रेजिमेंट तैयार
रक्षा मंत्रालय की योजना के अनुसार, भारतीय सेना पिनाका की कुल 22 रेजिमेंट तैयार करने पर काम कर रही है। सैन्य सूत्रों का कहना है कि मध्य-2026 तक 10 पिनाका रेजिमेंट पूरी तरह ऑपरेशनल होकर मोर्चे पर तैनात हो जाएंगी। यह विस्तार पिनाका को भारत की नई 'इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स' की रीढ़ बना देगा, जिससे सीमाओं पर भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
122mm स्वदेशी प्रोजेक्ट को क्यों मिला विश्राम?
DRDO ने पुराने 'ग्रैड' सिस्टम को बदलने के लिए एक नया 122mm स्वदेशी रॉकेट विकसित किया था, जिसने 40 किमी तक की मारक क्षमता का सफल परीक्षण भी किया था। बावजूद इसके, सेना ने इसे अपनाने के बजाय 214mm के पिनाका को प्राथमिकता दी है। इसके पीछे मुख्य कारण युद्ध की बदलती प्रकृति है:
भारी तबाही: पिनाका का 214mm रॉकेट पुराने 122mm के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिशाली है।
लंबी रेंज: पिनाका का गाइडेड वेरिएंट 75 किलोमीटर की दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
HIMARS जैसी रणनीति: यूक्रेन और अन्य आधुनिक युद्धों से सबक लेते हुए सेना अब अमेरिकी 'हिमार्स' (HIMARS) की तर्ज पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' क्षमता चाहती है, न कि केवल अंधाधुंध गोलाबारी।
सटीकता और सुव्यवस्थित रसद (Logistics)
आज के डिजिटल युद्धक्षेत्र में दुश्मन के रडार और ड्रोन कुछ ही सेकंड में जवाबी हमला करने में सक्षम हैं। ऐसे में 'एरिया सैचुरेशन' (एक बड़े क्षेत्र में बमबारी) के बजाय 'प्रिसिजन स्ट्राइक' (सटीक निशाना) महत्वपूर्ण है।
पिनाका को चुनने का एक और बड़ा कारण लॉजिस्टिक्स है। सेना अब अलग-अलग कैलिबर (122mm और 214mm) के गोला-बारूद के प्रबंधन के झंझट को खत्म करना चाहती है। पिनाका पर पूरी तरह शिफ्ट होने से सप्लाई चेन सरल होगी और युद्ध के समय रसद पहुंचाना आसान हो जाएगा।
पिनाका: क्यों है यह 'अजेय' योद्धा?
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| प्रहार क्षमता | मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागने की ताकत। |
| तकनीक | GPS और भारतीय NavIC तकनीक से लैस गाइडेड सिस्टम। |
| मारक रेंज | 75 किलोमीटर तक अचूक निशाना। |
| आत्मनिर्भरता | 100% स्वदेशी, विदेशी पुर्जों और गोला-बारूद पर निर्भरता खत्म। |
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निष्कर्ष: भारतीय सेना का यह रणनीतिक निर्णय 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक बड़ी छलांग है। रूसी 'ग्रैड' को हटाकर स्वदेशी 'पिनाका' को अपनाना न केवल सेना की लॉजिस्टिक्स चुनौतियों को कम करेगा, बल्कि दुश्मन के कमांड सेंटरों और रसद डिपो को लंबी दूरी से ही ध्वस्त करने की अचूक शक्ति भी प्रदान करेगा।